Four Stars of Destiny controversy: नई दिल्ली। सेना और शीर्ष सरकारी पदों से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा रिटायरमेंट के बाद संस्मरण या पुस्तक प्रकाशित करने पर 20 साल का कूलिंग पीरियड लागू करने की तैयारी ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में व्यापक बहस छेड़ दी है। सरकार इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीयता से जोड़कर देख रही है, जबकि विशेषज्ञ और लेखक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा मान रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट की हालिया बैठक के दौरान कई मंत्रियों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। हालांकि यह विषय आधिकारिक एजेंडे का हिस्सा नहीं था, लेकिन इसे गंभीरता से लिया जा रहा है और आने वाले समय में इस संबंध में औपचारिक दिशा निर्देश जारी किए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी से जुड़े विवाद के बाद सामने आया है।

Four Stars of Destiny controversy: प्रस्ताव के पीछे दलील

सरकार का मानना है कि सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संवेदनशील घटनाओं और आंतरिक निर्णयों का खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। विशेष रूप से सेना प्रमुख, कैबिनेट सचिव, आईएएस और आईपीएस जैसे उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारी कई गोपनीय सूचनाओं से जुड़े होते हैं। ऐसे में उनकी पुस्तकों या संस्मरणों के माध्यम से इन जानकारियों का सार्वजनिक होना देशहित के खिलाफ हो सकता है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत गोपनीय सूचनाओं का खुलासा करना अपराध है, लेकिन रिटायर्ड अधिकारियों के लिए कोई स्पष्ट और एक समान समय सीमा निर्धारित नहीं है। वर्ष 2025 में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने साहित्यिक कार्यों के लिए पूर्व अनुमति को अनिवार्य नहीं बताया था, लेकिन सरकारी नीतियों की आलोचना पर कुछ प्रतिबंध बनाए रखे थे। अब प्रस्तावित 20 साल की अवधि विशेष रूप से संवेदनशील पदों पर कार्यरत अधिकारियों पर केंद्रित है।

Four Stars of Destiny controversy: नरवणे की किताब से जुड़ा विवाद बना वजह

इस पूरे प्रस्ताव के पीछे पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस पुस्तक में वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच हुए सैन्य तनाव से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख किया गया था। यह मामला तब चर्चा में आया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पुस्तक का संदर्भ दिया, जबकि सरकार ने कहा कि पुस्तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है।

बाद में इस पुस्तक की डिजिटल प्रति सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिससे विवाद और बढ़ गया। सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लिया और इसे गोपनीयता से जुड़े नियमों के उल्लंघन के रूप में देखा।

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इस विवाद के बाद पुस्तक के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस ने इसे कॉपीराइट का उल्लंघन बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। दिल्ली पुलिस ने भी इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और प्रकाशक से पूछताछ की। जनरल नरवणे ने स्पष्ट किया कि उनकी पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई है और न ही इसका आधिकारिक वितरण किया गया है।

जानकारी के अनुसार, इस पुस्तक की रिलीज जनवरी 2024 में प्रस्तावित थी और इसके कुछ अंश पहले ही मीडिया में प्रकाशित हो चुके थे। हालांकि रक्षा मंत्रालय ने अभी तक पुस्तक के प्रकाशन को मंजूरी नहीं दी है और पेंशन नियमों का हवाला देते हुए इसे रोका गया है।

Four Stars of Destiny controversy: कैबिनेट स्तर पर अनौपचारिक चर्चा

कैबिनेट की हालिया बैठक में इस विषय पर अनौपचारिक चर्चा हुई, जिसमें वरिष्ठ पदों से सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए 20 साल का कूलिंग पीरियड लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, यह नियम विशेष रूप से सेना प्रमुख, कैबिनेट सचिव और अन्य प्रभावशाली पदों पर कार्य कर चुके अधिकारियों पर लागू हो सकता है।

यह प्रस्ताव वर्ष 2021 में आए एक पुराने प्रस्ताव से अलग बताया जा रहा है। उस समय सरकार पर रिटायर्ड नौकरशाहों की अभिव्यक्ति को सीमित करने का आरोप लगा था, लेकिन इस बार सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रही है।

Four Stars of Destiny controversy: प्रस्ताव पर आलोचना और चिंता

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इस प्रस्ताव को लेकर लेखक संगठनों, पूर्व अधिकारियों और सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि 20 साल का कूलिंग पीरियड अत्यधिक लंबा है और इससे अधिकारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम लागू किया गया, तो इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

पूर्व न्यायाधीशों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कहा है कि सेना और सरकारी अधिकारियों के लिए पहले से ही सेंसरशिप और अनुमति की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन 20 साल का प्रतिबंध अत्यधिक कठोर माना जा सकता है।

Four Stars of Destiny controversy: राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी चर्चा

विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव को नरवणे विवाद से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार आलोचनात्मक या संवेदनशील जानकारी को सामने आने से रोकने की कोशिश कर रही है। वहीं सरकार समर्थक विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस तरह के नियम जरूरी हो सकते हैं।

फिलहाल, इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय और आधिकारिक आदेश जारी होना बाकी है। लेकिन यह स्पष्ट है कि यदि यह नियम लागू होता है, तो भविष्य में वरिष्ठ सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी आत्मकथा या संस्मरण प्रकाशित करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।