टीआरपी डेस्क। आज के समय में 20 से 30 साल के युवाओं और छोटे बच्चों में फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो पहले केवल 40-50 साल की उम्र के बाद देखे जाते थे। विशेषज्ञों के अनुसार, शराब न पीने वालों में भी यह बीमारी फैल रही है, जिसका मुख्य कारण आधुनिक जीवनशैली और मैदा युक्त आहार है।

फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक्स के बढ़ते चलन से युवाओं का स्वास्थ्य खतरे में है। स्वास्थ्य जागरूकता की कमी के कारण लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे भविष्य में लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

फैटी लिवर: क्या है असल वजह?

एक्सपर्ट्स  के अनुसार, बिना शराब पीने वाले लोगों में होने वाली इस बीमारी को नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है। जब लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है, तो वह सही ढंग से काम करना बंद कर देता है।

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अक्सर लोग बाहर की रोटियां या जंक फूड खाते हैं, जिनमें मैदा की मात्रा अधिक होती है। यह मैदा, मीठे पेय पदार्थ और अधिक तला-भुना भोजन सीधे तौर पर लिवर पर फैट जमा करने के लिए जिम्मेदार है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ग्रेड 1 और ग्रेड 2 से शुरू होने वाली यह समस्या लिवर ट्रांसप्लांट तक पहुंच सकती है।

शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज

फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन शरीर कुछ संकेत जरूर देता है। यदि आपको लगातार थकान, पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द या अचानक वजन बढ़ने जैसी समस्या हो रही है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस स्थिति में लापरवाही जानलेवा हो सकती है।