टीआरपी। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रयागराज की एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने उनके और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध यौन शोषण के आरोपों के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज करने का बड़ा निर्देश दिया है।
शंकराचार्य जैसे उच्च धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ अदालत का यह आदेश पूरे देश सहित छत्तीसगढ़ के धार्मिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। निष्पक्ष जांच और कानून की सर्वोच्चता को लेकर यह फैसला एक महत्वपूर्ण नजीर पेश करता है, जिससे समाज में न्यायपालिका के प्रति विश्वास सुदृढ़ होता है।
यह पूरा मामला श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष व शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दाखिल की गई अर्जी से जुड़ा है। अदालत में बीते शुक्रवार को इस मामले पर विस्तृत सुनवाई हुई। एडीजे पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को निर्देशित किया है कि वह तत्काल मुकदमा दर्ज कर कानून के अनुसार विवेचना शुरू करे।
कोर्ट के इस आदेश के बाद अब प्रयागराज के झूंसी थाने में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। शिकायतकर्ता ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनकी सत्यता की जांच अब पुलिस प्रशासन द्वारा की जाएगी।
- आदेशकर्ता: एडीजे पॉक्सो स्पेशल कोर्ट, प्रयागराज (विनोद कुमार चौरसिया)।
- आरोपी: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी।
- संबंधित थाना: झूंसी थाना, प्रयागराज (FIR दर्ज करने का स्थान)।
- शिकायतकर्ता: आशुतोष ब्रह्मचारी (अध्यक्ष, श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट)।
अदालत के आदेश के बाद अब पुलिस को निर्धारित समय सीमा के भीतर एफआईआर दर्ज कर अपनी स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। इस मामले में शंकराचार्य पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन वे इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकते हैं।


