टीआरपी डेस्क। हरियाणा सरकार के 18 विभागों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले की आंच अब आम जनता और व्यापारियों तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के चलते चंडीगढ़ के 1800 से अधिक बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं, जिससे शहर के व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। प्रभावितों में बड़े बिजनेसमैन से लेकर छोटे किराना दुकानदार और ढाबा संचालक तक शामिल हैं।
पिछले 3 दिनों से लेनदेन बंद, साइबर सेल में पीड़ितों की कतार
चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित साइबर सेल थाने में पिछले तीन दिनों से पीड़ितों का जमावड़ा लगा हुआ है। रियल एस्टेट कारोबारी और रेस्तरां संचालकों का कहना है कि खाते फ्रीज होने से उनका पूरा कामकाज ठप हो गया है। वे न तो वेंडर्स को भुगतान कर पा रहे हैं और न ही कर्मचारियों को वेतन दे पा रहे हैं।
भावुक हुए पीड़ित: “बेटी की शादी है, पैसे कैसे निकालूं?”
थाने पहुंचे एक पीड़ित ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उनके घर में बेटी की शादी है। ऐन वक्त पर बैंक खाता फ्रीज होने से वे शादी की तैयारियों के लिए भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। परिवार इस समय गहरे मानसिक और आर्थिक संकट में है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चूंकि यह मामला पंचकूला साइबर सेल से जुड़ा है, इसलिए डी-फ्रीज की प्रक्रिया भी वहीं से संचालित होगी।
डीजीपी के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई
साइबर सेल के सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई हरियाणा के डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा के निर्देशों पर की गई है। जांच के केंद्र में सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) की शाखा भी है, जिसकी एक शिकायत पंचकूला भेजी गई है। पुलिस यह जांच रही है कि इन 1800 खातों में घोटाले की कितनी रकम घुमाई गई है।
प्रभावितों के लिए सलाह
वर्तमान में जिन भी खाताधारकों के अकाउंट फ्रीज हुए हैं, उन्हें चंडीगढ़ साइबर सेल द्वारा पंचकूला साइबर सेल से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है। जांच एजेंसी उन खातों को जल्द से जल्द बहाल करने की कोशिश करेगी जिनका घोटाले से कोई लेना-देना नहीं पाया जाएगा।



