बिलासपुर। अनुकंपा नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिससे कोयला क्षेत्र के कर्मचारियों के आश्रितों को बड़ी राहत मिली है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता (NCWA) के तहत मिलने वाली आश्रित नियुक्ति को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से नौकरी में है। कोर्ट ने South Eastern Coalfields Limited (SECL) को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाए।

कोर्ट ने क्या दिया आदेश..?

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को NCWA के तहत सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत नियुक्ति का वैध अधिकार है। जब तक समझौते में कोई स्पष्ट अयोग्यता का प्रावधान न हो, तब तक बाहरी कारणों के आधार पर आवेदन अस्वीकार करना मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 का उल्लंघन माना जाएगा।

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बिना कारण बताए नौकरी से किया इंकार

याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार की माता स्व. भगवानिया राजनगर ओसीएम में जनरल मजदूर के पद पर कार्यरत थीं और 7 मई 2011 को सेवा के दौरान उनका निधन हो गया। सेवा अभिलेख में याचिकाकर्ता को आश्रित के रूप में दर्ज किया गया था। उन्होंने सितंबर 2011 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन अप्रैल 2012 में बिना ठोस कारण बताए आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। लंबे समय तक कोई स्पष्ट निर्णय न मिलने पर उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली।

याचिकाकर्ता के पक्ष में दिया ये तर्क

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता चंद्रेश श्रीवास्तव ने दलील दी कि NCWA औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(प) और 18(3) के तहत बाध्यकारी समझौता है, इसलिए SECL उस पर अमल करने के लिए बाध्य है। वहीं SECL की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार वाजपेयी ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध था और याचिका में देरी हुई है।

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हाई कोर्ट का 45 दिनों में निराकरण का आदेश

हाई कोर्ट ने 20 अप्रैल 2012 के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर पुनः विचार किया जाए और यह निर्णय 45 दिनों के भीतर पारित  किया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्णय लेते समय इस तथ्य से प्रभावित न हों कि परिवार का अन्य सदस्य पहले से कार्यरत है।

यह फैसला कोयला क्षेत्र के कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए मिसाल माना जा रहा है, क्योंकि इससे अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में SECL की मनमानी अस्वीकृति पर रोक लगेगी।