Russian vertical launch Shtil-1 missile: मॉस्को/नई दिल्ली। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने रूसी कंपनी Rosoboronexport के साथ वर्टिकल लॉन्च श्टिल मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए बड़ा रक्षा समझौता किया है। इस सौदे के तहत भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की वायु रक्षा क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इससे हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत की समुद्री सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।

Russian vertical launch Shtil-1 missile: रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, सतह से हवा में मार करने वाली वर्टिकल लॉन्च श्टिल मिसाइलों और उनसे जुड़े मिसाइल होल्डिंग फ्रेम की खरीद के लिए रूस के साथ 2,182 करोड़ रुपए (करीब 236 मिलियन डॉलर) का अनुबंध किया गया है।

Russian vertical launch Shtil-1 missile: मंत्रालय का कहना है कि इस सौदे का उद्देश्य भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों को हवाई खतरों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है। मंत्रालय के अनुसार, इस प्रणाली के शामिल होने से नौसेना के युद्धपोत हेलीकॉप्टर, लड़ाकू विमान, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल और ड्रोन जैसे खतरों का तेजी से और हर मौसम में जवाब देने में सक्षम होंगे।

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Russian vertical launch Shtil-1 missile: क्या है श्टिल मिसाइल सिस्टम

श्टिल रूस द्वारा विकसित एक मीडियम रेंज, शिप-बेस्ड वर्टिकल लॉन्च सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है। इसमें मुख्य रूप से 9M317ME सेमी-एक्टिव रडार होमिंग मिसाइल का उपयोग किया जाता है, जो दुश्मन के हवाई लक्ष्यों को सटीकता के साथ भेदने में सक्षम है।

यह प्रणाली युद्धपोतों को हेलीकॉप्टर, सुपरसोनिक फाइटर जेट, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल और मानव रहित विमान (ड्रोन) जैसे विभिन्न हवाई खतरों से बचाने के लिए डिजाइन की गई है। इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ 12 लक्ष्यों को ट्रैक कर उन पर हमला कर सकती है।

Russian vertical launch Shtil-1 missile: रेंज और स्पीड

श्टिल मिसाइल की मारक क्षमता 3.5 किलोमीटर से 50 किलोमीटर तक है, जबकि यह 5 मीटर से 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक लक्ष्य को भेद सकती है। यह सिस्टम युद्धपोत के 3D रडार से प्राप्त जानकारी के आधार पर काम करता है और इसे पूरी तरह ऑटोमेटेड बनाया गया है, जिससे खतरे की स्थिति में प्रतिक्रिया समय बेहद कम हो जाता है।

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Russian vertical launch Shtil-1 missile: इस मिसाइल की गति ध्वनि की गति से लगभग 2.5 गुना अधिक है, जिससे यह तेज गति से आने वाले हवाई लक्ष्यों को भी प्रभावी ढंग से निशाना बना सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चीनी और पाकिस्तानी नौसैनिक गतिविधियों के बीच यह खरीद भारतीय नौसेना की सामरिक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।