नई दिल्ली। सॉफ्टवेयर की दुनिया के दिग्गज शांतनु नारायण ने एडोब (Adobe) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। 18 साल तक कंपनी की कमान संभालने वाले नारायण का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब पूरी दुनिया में एआई तकनीक का बोलबाला है और निवेशकों की नजरें कंपनी के भविष्य पर टिकी हैं।
नए उत्तराधिकारी की तलाश तक पद पर रहेंगे नारायण
दरअसल, 62 वर्षीय शांतनु नारायण तब तक सीईओ की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे जब तक कंपनी किसी योग्य उत्तराधिकारी को नहीं ढूंढ लेती। इस्तीफा देने के बाद भी वे एडोब के बोर्ड अध्यक्ष (चेयरमैन) के रूप में कंपनी के साथ अपना जुड़ाव बरकरार रखेंगे। नारायण का यह सफर न केवल ऐतिहासिक रहा है, बल्कि उन्होंने एडोब को एक साधारण सॉफ्टवेयर कंपनी से बदलकर ग्लोबल लीडर बनाया है।
AI से मिल रही कड़ी टक्कर
आज के दौर में फोटोशॉप जैसे सॉफ्टवेयर के लिए चुनौती बढ़ गई है। गूगल के Veo 3 जैसे नए एआई मॉडल्स ने विजुअल कंटेंट बनाना इतना आसान कर दिया है कि एडोब के महंगे सॉफ्टवेयर के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, एडोब ने अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए ‘फायरफ्लाई’ (Firefly) जैसे एआई टूल्स पेश किए हैं, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेतृत्व कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।
हैदराबाद से सिलिकॉन वैली तक का सफर
शांतनु नारायण का भारत से गहरा रिश्ता है। उनका जन्म और शुरुआती पालन-पोषण हैदराबाद में हुआ। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर आगे की शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। 1998 में एडोब से जुड़े नारायण 2007 में सीईओ बने। उनके कार्यकाल में एडोब ने न केवल तरक्की की, बल्कि उन्होंने खुद के नाम पांच पेटेंट भी दर्ज कराए।
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बीच इस्तीफा
हैरानी की बात यह है कि नारायण ने ऐसे समय में इस्तीफा दिया है जब एडोब के वित्तीय नतीजे उम्मीद से कहीं बेहतर हैं। कंपनी की बिक्री 12 फीसदी बढ़कर 6.4 बिलियन डॉलर रही है, जो विश्लेषकों के अनुमान से काफी अधिक है। ‘फायरफ्लाई’ जैसे एआई उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने भी उनके इस ‘ऐतिहासिक’ सफर की सराहना की है।
अगला कदम: निवेशकों की नजरें
निवेशक अब यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि नया सीईओ एडोब की पुरानी साख और एआई के आक्रामक निवेश के बीच कैसे संतुलन बिठाता है। एडोब का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वे नवाचार की गति को कैसे बनाए रखते हैं।



