अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान के परमाणु केंद्र नतांज (Natanz) पर जोरदार हमला किया है। बताया जा रहा है कि इस हमले में कोई रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हमले का मकसद नतांज केंद्र की संवर्धन गतिविधियों को निशाना बनाना था, लेकिन किसी प्रकार की मानव या पर्यावरणीय क्षति की खबर नहीं है।
तेहरान से 220 किलोमीटर दूर स्थित यह वही फैसिलिटी है, जो ईरान के यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) का मुख्य केंद्र है। ईरान ने इसे क्रूर हमला और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन करार दिया है।
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा तबाही का मंजर
बता दें कि इस हमले की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सैटेलाइट तस्वीरों में नतांज के एंट्री गेट और कई महत्वपूर्ण इमारतों के मलबे में तब्दील होने की पुष्टि हुई है।
नुकसान का आकलन: परमाणु ऊर्जा प्रमुख मोहम्मद इस्लामी के मुताबिक, तीन इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं।
रेडिएशन का खतरा: राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की है कि मुख्य भूमिगत (Underground) संवर्धन हॉल सुरक्षित है और फिलहाल किसी भी तरह के रेडियोलॉजिकल रिसाव (Radiation Leak) की खबर नहीं है।
जून 2025 के ’12-दिवसीय युद्ध’ की यादें ताजा
गौरतलब है कि यह हमला पिछले साल (जून 2025) हुए उस 12 दिनों के भीषण ईरान-इजरायल युद्ध की याद दिलाता है, जिसमें नतांज की बिजली आपूर्ति और फ्यूल प्लांट को भारी नुकसान पहुँचाया गया था।
IAEA प्रमुख का बयान और वैश्विक चिंता
दरअसल, आईएईए प्रमुख रफाएल ग्रॉसी ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। हालांकि उन्होंने बड़े पैमाने पर नए हमले से इनकार किया, लेकिन ईरानी दावों के विपरीत कुछ गंभीर क्षति होने की बात स्वीकार की है। जानकारों का मानना है कि इस हमले से ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई साल पीछे चला जाएगा, लेकिन इससे मध्य-पूर्व में प्रतिशोध (Retaliation) की एक नई और खतरनाक लहर शुरू हो सकती है।



