रायपुर। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन महासमुंद के सुप्रसिद्ध खल्लारी माता मंदिर में खुशियां मातम में बदल गईं। रविवार सुबह करीब 10:30 बजे जब श्रद्धालु माता के दर्शन कर रोप-वे से नीचे उतर रहे थे, तभी अचानक मुख्य केबल टूट गई। केबल टूटते ही श्रद्धालुओं से भरी ट्रॉली अनियंत्रित होकर करीब 20 फीट नीचे पहाड़ी की नुकीली चट्टानों से जा टकराई। इस रूह कंपा देने वाले हादसे में एक युवती की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 4 अन्य श्रद्धालु जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया शोक
हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह घटना अत्यंत पीड़ादायक है और उनकी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा, दुर्घटना की विस्तृत जांच की जाएगी और दोषियों को बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा। सीएम ने अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज के लिए जरूरी निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

अप्रैल 2024 में ही शुरू हुआ था सपनों का रोप-वे
गौरतलब है कि खल्लारी माता मंदिर में श्रद्धालुओं को 981 सीढ़ियां चढ़ने की थकान से मुक्ति दिलाने के लिए इसी साल अप्रैल 2024 (चैत्र नवरात्रि) से इस रोप-वे का पूरी तरह संचालन शुरू किया गया था। साल 2021 में इसका भूमिपूजन हुआ था और इसका निर्माण कोलकाता की प्रसिद्ध कंपनी रोपवे एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने मंदिर ट्रस्ट के साथ मिलकर किया था।

हादसे वाली रोप-वे प्रणाली की तकनीकी हकीकत
ग्राउंड सूत्रों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट काफी आधुनिक माना जा रहा था, लेकिन सुरक्षा के दावों की पोल खुल गई है। यह रोप-वे पहाड़ी की 130 मीटर की ऊंचाई को कवर करता है। पूरे रोप-वे की लंबाई लगभग 300 से 350 मीटर है। इसमें कुल 4 ट्रॉलियां लगी हैं। हर ट्रॉली में 4 व्यक्ति बैठ सकते हैं। यह सिस्टम एक घंटे में करीब 200 लोगों को ऊपर-नीचे ले जाने की क्षमता रखता है।

चट्टान से टकराई ट्रॉली, मची चीख-पुकार
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा उस वक्त हुआ जब श्रद्धालु दर्शन करके लौट रहे थे। केबल टूटने के बाद ट्रॉली सीधे नीचे की ओर आई और पहाड़ी की चट्टान से जा टकराई। जोरदार झटके के कारण ट्रॉली में सवार बच्चे और बुजुर्ग बुरी तरह लहूलुहान हो गए। स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत रेस्क्यू कर घायलों को बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

जनता पर असर और लापरवाही के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रोप-वे के नियमित रखरखाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है। नवरात्र के कारण भीड़ ज्यादा थी और ट्रॉली पर दबाव बढ़ गया था। प्रशासन ने अब एहतियात के तौर पर रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया है। छत्तीसगढ़ के अन्य प्रमुख मंदिरों, जैसे डोंगरगढ़, में भी अब सुरक्षा ऑडिट की मांग उठने लगी है।



