श्रीनगर/दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार (23 मार्च 2026) को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। यह कार्रवाई पिछले साल (10 नवंबर 2025) दिल्ली के प्रतिष्ठित लाल किले (Red Fort) के पास हुए भीषण कार ब्लास्ट की जांच के सिलसिले में की गई है। इस धमाके में 11 लोगों की जान गई थी और जांच एजेंसियां इसके व्हाइट-कॉलरटेरर मॉड्यूल की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

अधिकारियों के अनुसार, सोमवार सुबह से ही कश्मीर घाटी के विभिन्न जिलों में सघन तलाशी अभियान जारी है। घाटी के 9 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। यह कार्रवाई मुख्य रूप से कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा (गुलूरा इलाका), कुलगाम, बारामूला (रफियाबाद) और श्रीनगर (नौगाम) में चल रही है।

निशाने पर कौन?

जांच दल ने उन व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली है, जो इस आतंकी मॉड्यूल से जुड़े गिरफ्तार आरोपियों के करीबी बताए जा रहे हैं। इसमें हंदवाड़ा के एक प्रमुख कारोबारी का घर भी शामिल है।

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क्या बरामद हुआ?

एनआईए की टीमों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) के सहयोग से की गई इस छापेमारी में कई महत्वपूर्ण चीजें जब्त की हैं। इनमें संदिग्धों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के साथ बैंक ट्रांजेक्शन और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज शामिल है। डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए आतंकी नेटवर्क के विदेशी आकाओं से संपर्क की जांच की जा रही है।

लाल किला ब्लास्ट 2025: अब तक की जांच

दरअसल, 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक आईईडी (IED) से लदी कार में धमाका हुआ था। जांच में पता चला कि इस हमले का मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी था, जो खुद इस विस्फोट में मारा गया था। एनआईए ने अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें कई स्थानीय डॉक्टर और ओवर-ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) शामिल हैं। हाल ही में पटियाला हाउस कोर्ट ने सात आरोपियों की न्यायिक हिरासत 15 दिनों के लिए बढ़ाई है।

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सुरक्षाबलों का सख्त रुख

प्रशासन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों का उद्देश्य घाटी में सक्रिय ‘स्लीपर सेल्स’ और हाइब्रिड आतंकियों के मददगारों (OGWs) के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है। एनआईए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस ब्लास्ट के लिए फंड और हथियार कहां से मुहैया कराए गए थे।