बीजापुर। बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह से खत्म हो चुका है। नक्सलवाद एक बड़ी समस्या रही है, जो 45 वर्षों तक बस्तर के विकास और शिक्षा में बाधा बनी रही है, परंतु जब नक्सलवाद खत्म हो चुका है तो व्यवस्थाओं में सुधार के साथ नक्सलियों से जुड़ी निशानियों को खत्म कर उन जगहों पर सरकार को अपनी पहचान देनी चाहिए, मगर बीजापुर में एक ऐसा गांव है जहां पर सरकारी भवन की बजाय पिछले 4 सालों से नक्सलियों के बनाये स्कूल में ही सरकारी स्कूल का संचालन किया जा रहा है।

‘जनताना सरकार’ ने स्कूल के लिए बनाया था कच्चा मकान

बात बीजापुर के पेदा कोरमा ग्राम पंचायत की है, ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव में 2017 में नक्सलियों के जनताना सरकार ने एक स्कूल बनाया था, जहां वो गांव के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दिया करते थे। ग्रामीणों के श्रमदान से बने इस कच्चे मकान में कालांतर में 4 साल पहले यानी 2022 में यहां पर सरकारी स्कूल का पुनः संचालन शुरू किया गया। पर विडंबना तो देखिए कि स्कूल का संचालन शुरू होकर आज 4 साल बीत गए हैं, बावजूद इसके यहां पर बच्चों के लिए एक पक्के भवन की व्यवस्था नहीं हो पाई है, जिसकी वजह से आज भी नक्सलियों के ही बनाये स्कूल में सरकारी स्कूल का संचालन किया जा रहा है और भारी अव्यवस्था के बीच बच्चे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है।

See also  BhanuPratappur By Election: तस्वीर हुई साफ,चुनावी रेस में सबसे आगे निकली सावित्री मंडावी

आलमारी को बनाया बोर्ड

इस स्कूल में पढ़ा रहे एक शिक्षक जिस बोर्ड पर लिखकर बच्चों को समझा रहे थे, वह ब्लैक की बजाय व्हाइट बोर्ड जरूर है, मगर वह यहां रखी एक आलमारी का पल्ला है। शिक्षक ने बताया कि ब्लैक बोर्ड नहीं होने की वजह से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि इस पर कुछ भी लिखो तो वह मिट जाता है। तमाम अभावों के बीच चल रहे इस स्कूल में लगभग 2 दर्जन बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।

भवन की बजाय बन रहा है अतिरिक्त कक्ष..!

आश्चर्य की बात यह है कि विभाग इन बच्चों के लिए अब तक भवन बना नहीं पाया है मगर इस स्कूल के नाम पर अतिरिक्त कक्ष का निर्माण जरूर किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अतिरिक्त कक्ष की बजाय सबसे पहले बच्चों के लिए स्कूल भवन का निर्माण किया जाना चाहिए क्योंकि अब यहां के बच्चे पढ़ना चाहते हैं, बढ़ना चाहते हैं और शिक्षित होना चाहते हैं, मगर प्रशासन के इस रवैये से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

See also  बसों से गुड्स कैरियर हटाने के आदेश पर बवाल, ऑपरेटरों ने साय सरकार से कहा- तुगलकी फरमान' वापस लो

यहां अब तक कोई भवन नहीं बनाने की वजह इस इलाके के नक्सल प्रभावित होने की बात जरूर कही जा सकती है, लेकिन अगर ऐसा है तो यहां अतिरिक्त कक्ष कैसे बन रहा है। वहीं सवाल यह उठता है कि जब इस विद्यालय का कोई अपना पक्का भवन नहीं है तो फिर इसके लिए अतिरिक्त कक्ष कैसे स्वीकृत कैसे किया गया।

बहरहाल यह उम्मीद की जानी चाहिए कि बस्तर के इस गांव में छत्तीसगढ़ के अन्य इलाकों की तरह एक अदद सर्वसुविधायुक्त स्कूल भवन होगा, जहां बच्चे पढ़कर अपना भविष्य गढ़ेंगे।