टीआरपी डेस्क। आज के दौर में सोशल मीडिया पर कब क्या वायरल हो जाए, कोई नहीं जानता। लेकिन इन दिनों मेट्रो शहर के साथ छत्तीसगढ़ के रायपुर, भिलाई और बिलासपुर जैसे शहरों के वर्किंग प्रोफेशनल्स और Gen Z युवाओं के बीच एक शब्द खूब गूंज रहा है Chinamaxxing। सुनने में यह कोई फिल्मी नाम लग सकता है, लेकिन दरअसल यह कॉर्पोरेट की अंधी दौड़ और मानसिक तनाव से बचने का एक नया और असरदार तरीका बन गया है।
क्या है Chinamaxxing का फंडा?
इंटरनेट की भाषा में समझें तो Chinamaxxing का मतलब है चीनी लाइफस्टाइल की उन अच्छी आदतों को अपनाना जो सुकून देती हैं। ग्राउंड सूत्रों के अनुसार, अब युवा सुबह उठकर ठंडी कोल्ड कॉफी या रेड बुल की जगह हल्का गर्म पानी पी रहे हैं। जिम में भारी डंबल उठाने के बजाय रायपुर के मरीन ड्राइव (तेलीबांधा) या बिलासपुर के रिवर फ्रंट पर शांति से मेडिटेशन और ताइ-ची (Tai Chi) करते नजर आ रहे हैं।
क्यों छोड़ रहे हैं हसल कल्चर?
बता दें कि अब तक माना जाता था कि जो दिन-रात काम करेगा, वही सफल होगा। लेकिन आज की पीढ़ी यानी Gen Z ने अपने बड़ों को काम के चक्कर में बीमार होते देखा है। छत्तीसगढ़ के युवाओं का मानना है कि सफलता के लिए खुद को जलाना जरूरी नहीं है। अब युवा सुबह उठते ही दफ्तर के मेल चेक नहीं करते। डेडलाइन से ज्यादा जरूरी अब अच्छी नींद और मानसिक शांति हो गई है। ड्यूटी खत्म होते ही ऑफिस के कॉल रिसीव करना बंद करना अब नया ट्रेंड है।
ऑफिस कल्चर पर असर
गौरतलब है कि यह ट्रेंड सिर्फ वीडियो बनाने तक सीमित नहीं है। रायपुर के बड़े कॉर्पोरेट दफ्तरों और भिलाई के आईटी प्रोफेशनल्स के बीच यह माइंडसेट घर कर रहा है। युवा अब ऐसी नौकरियों को लात मारने में देर नहीं लगा रहे जहां उनके सुकून की कद्र नहीं होती। वे यांग शेंग यानी आंतरिक संतुलन की चीनी फिलॉसफी को अपनाकर लंबी उम्र और बेहतर सेहत पर दांव लगा रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि अगर कंपनियां अपनी कार्यशैली में बदलाव नहीं करतीं, तो उन्हें आने वाले समय में टैलेंट की कमी का सामना करना पड़ सकता है। बड़े शहरों में अब मेंटल हेल्थ पर चर्चा आम हो गई है। प्रशासन को भी अब निजी क्षेत्रों में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई गाइडलाइन पर विचार करने की जरूरत महसूस होने लगी है।


