कवर्धा। कबीरधाम जिले के वनांचल में रहने वाले बैगा परिवारों की गरीबी का फायदा उठाकर मासूमों के बचपन को महज 6 हजार रुपए सालाना में बेचा जा रहा है। यहां के बोड़ला ब्लॉक के थूहापानी और आसपास के गांवों से रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के दर्जन भर से अधिक नाबालिग बच्चों को बंधुआ मजदूर बनाकर रखा गया था। कबीरधाम पुलिस ने ऑपरेशन चलाकर इन बच्चों का रेस्क्यू किया और 2 दलालों समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गुमनाम चिट्ठी से हुआ मामले का खुलासा

एसपी कार्यालय में पहुंचे एक गुमनाम पत्र ने इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया। पत्र में खुलासा था कि ग्राम तिलईभाट निवासी रवि यादव और उसके साथी बैगा बच्चों को उनके माता-पिता से रिश्तेदारी का झांसा देकर ले जाते थे। इसके बदले में वे परिजनों को हजार-दो हजार से लेकर 6000 रूपये थमा दिया करते थे। इसके बाद बच्चों को सालाना में बेच या किराए पर दे दिया जाता था। बच्चों से मवेशी चराने और खेतों की रखवाली कराई जाती थी। हैरानी इस बात की है कि कई बच्चों को बॉण्ड (अनुबंध) पर भी लिया गया था।

गुमनाम पत्र को एसपी धर्मेंद्र सिंह छवई ने गंभीरता से लेते हुए तत्काल विशेष टीम गठित की। टीम ने जिले के ही ग्राम भलपहरी, खरहट्टा, पाण्डातराई, सारंगपुर कला, कान्हाभैरा और दशरंगपुर में दबिश दी। इस दौरान 13 बच्चों को अलग-अलग स्थानों से मुक्त कराया गया।

बच्चों ने सुनाई दर्दनाक कहानी

रेस्क्यू के बाद बच्चों को थाना लाकर पूछताछ किया गया। बच्चों ने बताया कि उन्हें गांव से यह कहकर ले जाया गया था कि वहां काम के एवज में अच्छा खाना और देखभाल मिलेगा, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें मजदूरी में लगा दिया गया। कुछ बच्चों ने बताया कि उन्हें तड़के उठाकर मवेशियों के साथ जंगल भेज दिया जाता था। दिनभर की मेहनत के बाद भी उन्हें न तो मजदूरी मिलती थी और न ही ठीक से भोजन। कई बच्चे महीनों से अपने परिवार से मिल तक नहीं पाए थे।

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मीडिया से बातचीत में कुछ बच्चों के परिजनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने काम कराने के लिए बच्चों को दो व्यक्तियों के सुपुर्द किया था। उनसे वादा किया गया था कि साल भर काम के एवज में कुछ पैसे देंगे। वहीं दलाल ने बच्चों के एवज में कुछ रूपये उन्हें दिए थे।

CWC में हुई काउंसलिंग, बालगृह में रखा गया

रेस्क्यू के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड लाइन की टीम को बुलाया गया। इनमें से 6 बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। CWC के निर्देश पर सभी बच्चों को फिलहाल बालगृह में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग और स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है।

गरीबी और अशिक्षा प्रमुख वजह

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्रीमती कमलेश चंद्रवंशी ने बताया कि जब इन बैगा बच्चों की कॉउन्सिलिंग की गई तब पता चला कि इनमें से केवल एक बच्चा ही कक्षा पहली तक पढ़ा है, शेष बच्चे कभी स्कूल ही नहीं गए हैं। स्वाभाविक है कि इनके परिजन भी अनपढ़ होंगे। इनकी अज्ञानता और गरीबी का फायदा गांवों के चंद सक्षम लोग उठा रहे हैं, जिनके दलाल ने इन्हे चंद रूपये दिए और बच्चों को अपने साथ ले गए।

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0 बच्चों के परिजन

अपने घर वापस नहीं जाना चाहते कई बच्चे

कमलेश चंद्रवंशी ने बताया कि इनमें से अधिकांश बच्चे अपने घर वापस नहीं जाना चाहते। बच्चों ने बताया कि उन्हें दूसरी जगह काम के एवज में जो कुछ भी खाने-पीने को मिलता है, उतना तो उन्हें घर पर नहीं मिल पाता, ऐसे में वे घर जाकर क्या करेंगे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बैगा आदिवासी परिवार कितनी गरीबी के दौर से गुजर रहे हैं।

और भी बच्चे होंगे बंधुआ

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष कमलेश चंद्रवंशी ने आशंका जताई कि ऐसे और भी बच्चों से बंधुआ मजदूरी कराई जा रही होगी। उनकी तलाश के लिए जिला बल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन, बचपन बचाओ आंदोलन और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाये। ऐसे में बाकी बच्चों का भी रेस्क्यू किया जा सकेगा।

पुलिस ने 8 को किया गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में दो दलालों समेत इन बच्चों को बंधक बनाकर रखने वाले 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें रामू यादव पिता इतवारी यादव (53) निवासी ग्राम भलपहरी, रवि यादव पिता गोपाल यादव (38) निवासी ग्राम थूहापानी, धनीराम यादव पिता ज्ञान यादव(55) निवासी ग्राम कान्हाभेरा, सर्वन यादव पिता कपिल यादव (45) निवासी ग्राम कान्हाभेरा, दीपक यादव पिता रामजी यादव (25) निवासी ग्राम कान्हाभेरा, रामफल यादव ग्राम सारंगपुर, राम बिहारी यादव, रुपेश यादव शामिल हैं।

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इन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई

थाना भोरमदेव पुलिस ने रवि यादव और साथियों पर भारतीय न्याय संहिता 2023, जेजे एक्ट की धारा 75, 79, बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम की धारा 3, 14, बंधुआ मजदूर प्रणाली उन्मूलन अधिनियम 1976 की धारा 16, 17, 18 और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।

अन्य बच्चों की भी होगी खोजबीन

एसपी धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि बच्चों से मजदूरी कराना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि मानवता के खिलाफ भी है। उन्होंने संभावना जताई कि इसी तरह और बच्चे भी बंधुआ मजदूर बनाये गए होंगे, सूचनाओं के आधार पर उनकी तलाश की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी या बाल तस्करी जैसी जानकारी मिलते ही तुरंत पुलिस को सूचना दे।

सरकारी योजनाओं का क्या है औचित्य..?

कबीरधाम जिले में रेस्क्यू किये गए इन बैगा आदिवासी बच्चों के प्रकरण ने इस बात का अहसास करा दिया है कि विशेष संरक्षित आदिवासियों के लिए चलाई जा रही विशेष योजनाएं प्रशासन की चौखट पर ही दम तोड़ रही हैं। वहीं स्कूलों से ड्रॉपआउट होने वाले बच्चों के गलत आंकड़े भी शिक्षा विभाग द्वारा दिए जा रहे हैं, अन्यथा ये बच्चे बंधुआ मजदूरी करने की बजाय आज स्कूलों में पढ़ रहे होते। कायदे से इन बैगा सहित अन्य संरक्षित आदिवासी परिवारों का नए सिरे से सर्वेक्षण कराते हुए इनके कल्याण के लिए योजना बनाकर उन पर गंभीरता से अमल करना चाहिए।