राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में देश की 66 महान हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस गरिमामयी सूची में छत्तीसगढ़ के सुदूर और संवेदनशील बस्तर संभाग में दशकों से नि:स्वार्थ सेवा दे रहे डॉक्टर दंपती डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है।
36 वर्षों का बेमिसाल सफर
मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा जिले के रहने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी डॉ. सुनीता गोडबोले 1990 के दशक में बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले के बारसूर पहुंचे थे। तब से लेकर आज तक दोनों वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से अत्यंत कठिन और आंतरिक ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार सक्रिय हैं। स्थानीय आदिवासी और वनवासी समाज इन्हें बेहद सम्मान और प्यार से “डॉक्टर भैया-भाभी” के नाम से पुकारता है।

इस डॉक्टर दंपती ने बस्तर के बीहड़ों में कुष्ठ रोग, टीबी, पीलिया और मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों के खिलाफ गांव-गांव जाकर न केवल अलख जगाई, बल्कि 1 लाख से भी अधिक स्थानीय मरीजों का पूरी तरह से मुफ्त और सफल इलाज किया है। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ इस दंपती ने स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा की व्यवस्था करने और समाज को नशे के चंगुल से बाहर निकालने के लिए भी कई बड़े जागरूकता अभियान चलाए हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी प्रदेशवासियों की ओर से बधाई
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉक्टर दंपती को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के सुदूर जनजातीय इलाकों में दशकों से बिना किसी स्वार्थ के सेवा की मिसाल पेश करने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले को पद्मश्री मिलना पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली विषय है।
माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा बस्तर के सुदूर जनजातीय अंचलों में दशकों से निःस्वार्थ चिकित्सा सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता एवं मानवता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले जी एवं श्रीमती सुनीता गोडबोले जी को पद्म श्री सम्मान से अलंकृत किया जाना… pic.twitter.com/UgvEOusceV
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) May 25, 2026



