टीआरपी डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से इस वक्त एक बेहद खूबसूरत और बड़ी खबर सामने आ रही है। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कोलकाता के ऐतिहासिक और मशहूर रेड रोड पर हजारों लोगों के साथ मिलकर योग किया। इस भव्य कार्यक्रम में सुबह से ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। सफेद रंग की टी-शर्ट और सफेद पैंट पहने प्रधानमंत्री बिल्कुल साधारण तरीके से आम नागरिकों के बीच पहुंचे और जमीन पर बैठकर योगासन किए। यह पूरा आयोजन एक ऐसे शानदार मैदान पर हुआ, जिसके एक तरफ भारतीय सेना का ईस्टर्न कमांड यानी पूर्वी कमान का मुख्यालय है और दूसरी तरफ कोलकाता का प्रसिद्ध विशाल मैदान क्षेत्र है।
चालीस मिनट के सेशन में लोगों के बीच पहुंचे प्रधानमंत्री
रेड रोड पर आयोजित यह योग सत्र लगभग चालीस मिनट तक चला। इस दौरान एक बेहद खास नजारा देखने को मिला, जब पीएम मोदी योग करते-करते अचानक लोगों के बीच खुद चलकर पहुंच गए। वे मैदान में घूम-घूम कर वहां मौजूद साधकों को योग करते हुए बड़े ध्यान से देख रहे थे। वे यह पक्का करना चाह रहे थे कि लोग योग के नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं या नहीं। कई मौकों पर जब उन्होंने देखा कि कुछ लोग आसन सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्होंने खुद आगे बढ़कर लोगों के योगासन और शारीरिक मुद्राओं को ठीक कराया। प्रधानमंत्री को अपने इतने करीब पाकर वहां मौजूद युवाओं और बुजुर्गों का उत्साह दोगुना हो गया।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और कई वरिष्ठ नेताओं ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
इस विशाल योग प्रदर्शन में केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि हर उम्र के स्कूल-कॉलेज के छात्रों और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी निभाई। योग के इस महापर्व में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि, राज्य के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी, दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल और दीपक बर्मन समेत केंद्र और राज्य सरकार के कई मंत्रियों और जन-प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की। पूरे मैदान में हर तरफ योग मैट बिछी हुई थीं और हजारों लोग एक ही लय में प्राणायाम और ध्यान लगाते नजर आए। इस सफल आयोजन ने कोलकाता के इस ऐतिहासिक मार्ग को पूरी तरह से अध्यात्म और स्वास्थ्य के रंग में सराबोर कर दिया।
साल 2015 से लगातार दुनिया भर में गूंज रहा है भारत के योग का डंका
गौरतलब है कि साल 2015 में यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली यानी संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने भारत के उस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसमें 21 जून को हर साल ‘इंटरनेशनल डे ऑफ योग’ के रूप में मनाने की बात कही गई थी। संयुक्त राष्ट्र दुनिया के तमाम देशों का एक ऐसा बड़ा संगठन है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े फैसले लिए जाते हैं। भारत के इस प्रस्ताव को दुनिया भर का समर्थन मिला था। इसके बाद से ही पीएम मोदी ने हर साल देश और विदेश के अलग-अलग कोनों जैसे नई दिल्ली, चंडीगढ़, लखनऊ, मैसूरु, न्यूयॉर्क, श्रीनगर और विशाखापत्तनम में इस बड़े जश्न की खुद अगुवाई की है। इसी कड़ी में साल दो हजार छब्बीस का यह योग दिवस कोलकाता के नाम रहा।



