टीआरपी डेस्क। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से 2800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। इसके लिए राज्य के वित्त विभाग ने मंगलवार को दो अलग-अलग हिस्सों में बॉन्ड यानी सरकारी लोन दस्तावेज जारी करने का फैसला किया है। इसके तहत सरकार बाजार से 1600 करोड़ और 1200 करोड़ रुपये के दो अलग-अलग फंड जुटाएगी। इस नए लोन को मिलाकर केवल इस चालू वित्तीय वर्ष में ही सरकार का कुल कर्ज 13,800 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा। वहीं पूरे मध्य प्रदेश पर कुल उधारी का आंकड़ा बढ़कर करीब 5 लाख 2 हजार करोड़ रुपये हो जाएगा।
रिजर्व बैंक के ई-कुबेर सिस्टम से होगी नीलामी
वित्त विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार दो तरह के स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज यानी सरकारी लोन बॉन्ड जारी कर रही है। पहले हिस्से में 1600 करोड़ रुपये का लोन 8 साल के लिए लिया जाएगा, जिस पर 7.64 फीसदी की दर से ब्याज चुकाना होगा। दूसरे हिस्से में 1200 करोड़ रुपये का लोन 22 साल की लंबी अवधि के लिए लिया जाएगा, जिस पर 7.83 फीसदी का ब्याज तय किया गया है। इन दोनों सरकारी बॉन्ड की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ई-कुबेर सिस्टम के जरिए की जाएगी। ई-कुबेर असल में रिजर्व बैंक का एक केंद्रीय कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म है, जहां बैंकों और सरकारों के बीच पैसों और बॉन्ड का ऑनलाइन लेनदेन होता है।
विकास कार्यों और सड़कों पर खर्च होगी रकम
राज्य सरकार का दावा है कि इस भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल प्रदेश के विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स यानी सड़क, बिजली, पानी और पुल जैसे बुनियादी ढांचों के निर्माण पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि सरकार इस पैसे को सिंचाई योजनाओं और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने में खर्च कर सकती है। आपको बता दें कि 31 मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश पर करीब 4.88 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब इस नए लोन के बाद 5 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर को पार करने जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर दबाव और बढ़ सकता है



