पंजाब सरकार को अकाल तख्त का बड़ा आदेश

टीआरपी। जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 को लेकर पंजाब की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। इस विवादित कानून के मसौदे को लेकर आम आदमी पार्टी के नौ सिख मंत्री, विधानसभा स्पीकर और 30 सिख विधायकों सहित कांग्रेस व अकाली दल के नेता श्री अकाल तख्त साहिब में जत्थेदार के सामने पेश हुए।

सिख धर्म और मर्यादा से जुड़े इस संवेदनशील कानून का असर देशव्यापी है। छत्तीसगढ़ में रहने वाले सिख समुदाय और गुरु नानक नाम लेवा संगत के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि श्री गुरु ग्रंथ साहिब महाराज की बेअदबी से जुड़े कानूनों में किसी भी तरह के बदलाव या राजनीतिक हस्तक्षेप का देश के हर कोने में रह रहे सिख समाज पर सीधा धार्मिक और सामाजिक प्रभाव पड़ता है।

पंजाब सरकार को एक महीने का समय, कानून होल्ड पर रखने के निर्देश


श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब सरकार को एक महीने की कड़ी मोहलत दी है। जत्थेदार ने दो टूक शब्दों में आदेश दिया है कि एक माह के भीतर बेअदबी कानून की सभी आपत्तियों को दूर किया जाए और तब तक के लिए इस कानून को पूरी तरह से होल्ड पर रखा जाए। इस दौरान ‘आप’ के मंत्रियों और विधायकों ने नंगे पैर अकाल तख्त पहुंचकर अपना लिखित स्पष्टीकरण सौंपा।

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सुनवाई के दौरान जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुराने बयानों पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि क्या कानून में ऐसी कोई व्यवस्था है कि बेअदबी करने वाला मानसिक बीमार हो तो सजा माता-पिता को मिले? इस पर पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। जत्थेदार ने साफ कहा कि सिख समुदाय से जुड़े मामलों में कानून बनाने से पहले अकाल तख्त, शिरोमणि कमेटी और अन्य सिख संस्थाओं से औपचारिक सलाह ली जानी अनिवार्य थी।

विपक्ष ने घेरा; आप सरकार पर राजनीति करने के आरोप


पेशी के दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी चरम पर रही। कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा ने ‘आप’ नेताओं पर महिलाओं का सम्मान न करने और विधानसभा में गलत भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए, जबकि कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे को पहले ही विधानसभा में उठाया था।

वहीं, शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल पर सीधा हमला बोला। मजीठिया ने आरोप लगाया कि बैसाखी के दिन तैयार किया गया यह बिल पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने इसे संगत को गुरु ग्रंथ साहिब महाराज से दूर करने की एक साजिश करार देते हुए कहा कि अकाल तख्त की मंजूरी के बिना इसे पारित करने का सवाल ही नहीं उठता।

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बड़ा फैसला: श्री अकाल तख्त साहिब ने बेअदबी कानून (संशोधन) एक्ट-2026 को एक महीने के लिए होल्ड पर रखने का आदेश दिया।

नेताओं की पेशी: ‘आप’ के 9 मंत्री, विधानसभा स्पीकर और 30 सिख विधायक लिखित स्पष्टीकरण देने नंगे पैर पहुंचे।

लाइव टेलीकास्ट पर रोक: संवेदनशीलता को देखते हुए विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर की मांग पर इस पूरी कार्यवाही का लाइव टेलीकास्ट नहीं किया गया।


जत्थेदार के आदेश के बाद अब पंजाब सरकार को एक महीने के भीतर सिख संस्थाओं और शिरोमणि कमेटी के साथ बैठकर कानून के मसौदे में सुधार करना होगा। यदि सरकार इन आपत्तियों को दूर करने में विफल रहती है, तो आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री भगवंत मान की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।