धमतरी। महासमुंद, गरियाबंद, रायपुर, धमतरी और ओडिशा को जोड़ने वाले मेघा महानदी पुल के निर्माण में बड़ा हादसा हो गया। यहां दो हैवी क्रेन से चढ़ाते समय 10-12 टन वजनी गर्डर गिरकर कई टुकड़ों में टूट गया। 46.97 करोड़ की इस परियोजना की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राहत की बात रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।
मलबा दबाने का आरोप, जांच की मांग
जिला पंचायत सदस्य नीलम चंद्राकर ने निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गर्डर टूटने के बाद मलबे को मशीनों से दबाकर जमीन में मिलाने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि अगर निर्माण मानकों के अनुरूप होता तो क्षतिग्रस्त गर्डर को जांच के लिए सुरक्षित रखा जाता। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

तकनीकी निगरानी में लापरवाही का आरोप
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि हादसे के समय तकनीकी अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे और महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी में लापरवाही बरती गई। यह पुल भविष्य में हजारों वाहनों का भार उठाएगा, इसलिए निर्माण गुणवत्ता से समझौता बड़े खतरे को जन्म दे सकता है। पुल का निर्माण कार्य 8 जनवरी 2025 से चल रहा है।
डायवर्सन रोड भी बना मुसीबत
पुल निर्माण में देरी के साथ डायवर्सन मार्ग की खराब हालत ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों के अनुसार साढ़े पांच करोड़ की स्वीकृति के बावजूद लंबे समय तक सड़क नहीं बनी। बाद में मिट्टी-मुरूम डालकर बनाई गई अस्थायी सड़क बारिश में खराब हो गई। इसके कारण मेघा से कुरूद की 12 किमी दूरी के लिए लोगों को करीब 40 किमी अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों ने प्रोजेक्ट की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।



