सरगुजा। अंबिकापुर में प्राइवेट स्कूलों पर महंगी निजी किताबें खरीदने के लिए पेरेंट्स पर दबाव बनाने का आरोप लगा है। भाजपा पार्षद आलोक दुबे की शिकायत पर कलेक्टर के निर्देश के बाद DEO दिनेश कुमार झा ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है। टीम को 3 दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी।

फ्री किताबों के बावजूद 2 से 5 हजार का सेट

शिकायत में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ बोर्ड के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पहली से 10वीं तक सरकार मुफ्त किताबें देती है। इसके बावजूद कई प्राइवेट स्कूल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें पढ़ा रहे हैं। पहली कक्षा की किताबों का सेट 2 हजार रुपए और पांचवीं का सेट करीब 5 हजार रुपए में बेचा जा रहा है। आरोप है कि स्कूल, निजी प्रकाशकों और चुनिंदा दुकानों से मिलकर काम कर रहे हैं। पेरेंट्स को वॉट्सऐप पर लिस्ट भेजकर तय दुकानों से ही किताबें खरीदने को कहा जाता है।

बच्चों के भविष्य के डर से नहीं करते शिकायत

पार्षद आलोक दुबे के मुताबिक कई पेरेंट्स शिकायत करना चाहते हैं, लेकिन बच्चों को स्कूल प्रबंधन द्वारा परेशान करने के डर से सामने नहीं आते। बच्चों के भविष्य की चिंता में वे चुपचाप महंगी किताबें खरीदने को मजबूर हैं।

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3 दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट

कलेक्टर के निर्देश पर DEO ने एलपी गुप्ता, मीना पुरोहित और संजय सिंह की जांच टीम बनाई है। टीम को तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश हैं। इससे पहले भी CBSE से मान्यता प्राप्त स्कूलों पर निजी किताबें चलाने की शिकायत हुई थी। तब DEO ने कई बड़े स्कूलों को नोटिस जारी किया था। उधर CBSE स्कूलों का तर्क था कि बोर्ड की किताबें समय पर और पर्याप्त संख्या में नहीं मिलतीं, इसलिए निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ानी पड़ती हैं।