मनेंद्रगढ़। ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ में बड़ा घोटाला सामने आया है। खड़गवां के चनवारीडांड स्थित महामाया मंदिर परिसर में सामूहिक विवाह में मंगलसूत्र चांदी के नहीं बल्कि ‘गिलेट’ के बांटे गए थे। कलेक्टर संतन देवी जांगड़े द्वारा कराई गई उच्च स्तरीय जांच में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सौरव मिश्रा की शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई है। रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है और डीपीओ के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है।

चांदी के नाम पर बांटा गिलेट मगर अनुशंसा नहीं
जांच प्रतिवेदन के अनुसार विवाह में वधुओं को चांदी के मंगलसूत्र देने थे। लेकिन जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा ने चांदी के बदले अन्य धातु के मंगलसूत्र वितरित करवा दिए। दरअसल क्रय समिति ने नोटशीट में स्पष्ट रूप से ‘चांदी का मंगलसूत्र’ की अनुशंसा की थी, इसके बावजूद बिना सक्षम वित्तीय स्वीकृति के सामान खरीदा गया।
कोटेशन से लेकर सत्यापन तक में गड़बड़ी
इस मामले की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
– नियमों की अनदेखी: कोटेशन तो लिए गए, पर तुलनात्मक पत्रक और कोटेशन खोलने वाली क्रय समिति के हस्ताक्षर और प्रशासनिक अनुमोदन नहीं लिया गया।
– भौतिक सत्यापन नहीं: विभाग ने खरीदी गई सामग्री और मंगलसूत्रों का भौतिक सत्यापन ही नहीं कराया, जिससे नकली सामान आसानी से खप गया।
– राशि में कटौती: विभाग का कहना है कि गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर फर्म की राशि से ₹1,000 प्रति मंगलसूत्र काटकर वधुओं के खाते में ₹36,000 जमा किए गए।

कलेक्टर ने रिपोर्ट शासन को भेजी, कांग्रेस ने घेरा
कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट अग्रिम दंडात्मक कार्रवाई के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव, नवा रायपुर को भेज दी है। रिपोर्ट में DPO आदित्य शर्मा को वित्तीय नियमों के उल्लंघन और लापरवाही का दोषी माना गया है।
संचालक के प्रेस नोट पर उठाया सवाल
इस मुद्दे को लेकर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस नेता सौरव मिश्रा ने कहा कि एक तरफ महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक प्रेस विज्ञप्ति से भ्रष्टाचार छिपा रहे थे, दूसरी तरफ कलेक्टर की रिपोर्ट में शिकायत सच साबित हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों को तत्काल निलंबित कर जेल नहीं भेजा गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
मामले में कलेक्टर की कार्रवाई की अनुशंसा और जांच प्रतिवेदन:







