Stock Market Collapse: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशकों की धारणा बुरी तरह प्रभावित हुई। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 337.74 अंक यानी लगभग 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,417.31 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 78.21 अंक फिसलकर 23,918.05 के स्तर पर आ गया। सुबह से ही बाजार में दबाव देखा गया और इंडिगो तथा इंफोसिस जैसे दिग्गज शेयरों में 2 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
पश्चिम एशिया में जारी भारी संघर्ष और अमेरिकी सेना के ईरान पर लगातार 12वें हमले की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में घबराहट का माहौल है। ब्रेंट क्रूड अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5 सप्ताह के उच्चतम स्तर 95 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है। दूसरी ओर, भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 5 पैसे सुधरकर 96.48 के स्तर पर खुली। इस मामूली सुधार के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनिमय दर को संभालने के संभावित हस्तक्षेप को जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से घरेलू बाजार में लगातार की जा रही बिकवाली ने बाजार के सुधार की हर गुंजाइश को दबा दिया।
क्यों हो रहा रहा उतार चढ़ाव ?
वैश्विक मोर्चे पर जब तक कच्चे तेल के दामों में नरमी नहीं आती और पश्चिम एशिया में सैन्य झड़पें शांत नहीं होतीं, तब तक भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। विदेशी पूंजी की निकासी और 95 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल हमारी अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रहा है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
शेयर बाजार में लगातार हो रही गिरावट का सीधा असर खुदरा निवेशकों की संपत्ति और पोर्टफोलियो पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के चालू खाते के घाटे (CAD) को बढ़ा सकती हैं, जिससे आने वाले समय में महंगाई दर पर दबाव देखने को मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अल्पकालिक अवधि में निफ्टी 23,800 से 24,000 के सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। यदि विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयरों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
बाजार में बड़ा उछाल आने की संभावना
कुल मिलाकर, 23 जुलाई का कारोबारी दिन भारतीय निवेशकों के लिए निराशाजनक रहा। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक हालात जब तक सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में बड़ा उछाल आने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है। विश्लेषकों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे फिलहाल आक्रामक खरीदारी करने के बजाय केवल चुनिंदा मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही ध्यान केंद्रित करें। बाजार का अगला रुख कंपनियों के तिमाही परिणामों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।


