भिलाई जमीन सौदा मामले में रीता सिंह के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर दर्ज एफआईआर
4.39 करोड़ रुपये के कथित जमीन सौदे में कोर्ट के आदेश पर रीता सिंह समेत तीन लोगों के खिलाफ उतई पुलिस ने मामला दर्ज किया।

Rita Singh Fraud Case: जिले में करोड़ों रुपये के जमीन सौदे में कथित धोखाधड़ी के आरोपों पर कांग्रेस नेत्री और भिलाई नगर निगम की एमआईसी सदस्य रीता सिंह, उनके पति रमेश चंद्र सिंह और बेटे मानवचंद सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई पाटन स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत के आदेश के बाद उतई पुलिस ने की। मामला रायपुर निवासी बीपी सिंह की शिकायत पर दर्ज हुआ है।

कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर

शिकायतकर्ता बीपी सिंह ने अदालत में निजी परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि करोड़ों रुपये लेने के बावजूद जमीन सौदे की शर्तें पूरी नहीं की गईं। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला बनता हुआ माना और उतई पुलिस को तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। अदालत ने पुलिस को 15 दिनों के भीतर एफआईआर और अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

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4.50 करोड़ रुपये में तय हुआ था सौदा

शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 में छांटा स्थित गिट्टी खदान और उससे लगी 25 एकड़ जमीन का सौदा 4 करोड़ 50 लाख रुपये में तय हुआ था। इस सौदे में एक चैन मशीन और दो हाइवा वाहन भी शामिल थे। शिकायत में दावा किया गया है कि कुल 25 एकड़ जमीन में से 13 एकड़ जमीन आरोपियों के नाम थी, जबकि 7 एकड़ दान की भूमि और 5 एकड़ सरकारी लीज की जमीन को भी सौदे का हिस्सा बताया गया था।

4.39 करोड़ रुपये चेक से देने का दावा

  • 2 करोड़ 90 लाख रुपये मानवचंद सिंह के खाते में जमा किए गए।
  • 1 करोड़ रुपये रीता सिंह के खाते में जमा किए गए।
  • शेष राशि रमेश चंद्र सिंह के खाते में ट्रांसफर की गई।

शिकायतकर्ता का कहना है कि भुगतान के बाद केवल 7 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। बाकी जमीन का न तो नामांतरण कराया गया और न ही सौदे की अन्य शर्तों का पालन किया गया।

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दस्तावेजों में फर्जीवाड़े का आरोप

बीपी सिंह ने आरोप लगाया है कि बाद में दस्तावेजों की जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं। उनके अनुसार, जिन लोगों ने जमीन बेचने का दावा किया, वे वास्तविक भू-स्वामी नहीं थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तीनों आरोपियों ने मिलकर फर्जी इकरारनामा और अन्य दस्तावेज तैयार कराए। इसमें वास्तविक जमीन मालिकों के स्थान पर अन्य लोगों के हस्ताक्षर कराए गए और कथित रूप से गलत जानकारी के आधार पर करोड़ों रुपये का सौदा किया गया।

पुलिस करेगी दस्तावेज और लेनदेन की जांच

अदालत के आदेश के बाद उतई पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान दस्तावेजों की सत्यता, पैसों के लेनदेन, जमीन के मालिकाना हक और सौदे से जुड़े अन्य सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।