Women’s toilet built in Durg Jail after 3 years: “न्याय मिलने तक आवाज उठाती रहूंगी” – सोशल मीडिया पर की गई इसी पुकार का असर हुआ। केन्द्रीय जेल दुर्ग के प्रशासनिक भवन में आखिरकार महिला शौचालय की व्यवस्था कर दी गई है। 

18 साल सेवा के बाद पुरुष शौचालय इस्तेमाल करने को मजबूर महिला अधिकारी के पोस्ट के बाद सिस्टम हरकत में आया और 3-4 साल से लंबित मांग पूरी हुई।

क्या था पूरा मामला?

केन्द्रीय जेल दुर्ग में तैनात महिला अधिकारी वर्षा संतोष कुंजाम 

ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर लिखा था कि जेल में महिला शौचालय न होने के कारण उन्हें पुरुष शौचालय इस्तेमाल करना पड़ रहा है। 

सुरक्षा और शर्म दोनों का संकट

महिला अधिकारी ने 4 बड़ी समस्याएं बताई थीं:

1. सुरक्षा का खतरा: पुरुष शौचालय के दरवाजे पर सिटकनी नहीं है। सिर्फ लकड़ी का टुकड़ा लगा है। उनके साथ 3 बार ऐसा हुआ कि फ्रेश होते समय किसी पुरुष कर्मचारी ने जोर से दरवाजा धक्का देकर खोलने की कोशिश की।

2. सफाई नहीं: कई बार पुरुष कर्मचारी बिना पानी से साफ किए चले जाते हैं। उन्हें पहले खुद सफाई करनी पड़ती है।

3. पीरियड में परेशानी: पीरियड के दौरान वर्दी में खून के दाग लग जाते हैं। असहज और असुरक्षित महसूस होता है।

4. असंवेदनशील जवाब: जब कहा गया तो जवाब मिला “महिला जेल जाकर फ्रेश हो आइए”। जबकि उनकी ड्यूटी केन्द्रीय जेल दुर्ग में वारंट अधिकारी के पद पर है।

पहले एक बार सिटकनी लगवाई भी गई थी, लेकिन बाद में यह कहकर तोड़ दी गई कि बंदी अंदर आत्मघाती कदम उठा सकते हैं।

0 गृहमंत्री को लिखा वर्षा कुंजाम का पत्र

कलेक्टर दौरे पर भी नहीं हुआ समाधान

01.08.2026 को कलेक्टर अभिजीत सिंह और जेल अधीक्षक मनीष संभाकर जेल भ्रमण पर आए। दोपहर 12:15 बजे महिला अधिकारी ने कलेक्टर के सामने पुरुष शौचालय का दरवाजा खोलकर पूरी समस्या बताई।

कलेक्टर ने अधीक्षक से पूछा तो जवाब मिला: “सभी महिला अधिकारी महिला जेल जाकर फ्रेश होती हैं, केवल इन्हें ही समस्या है”।

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महिला अधिकारी ने कहा कि बीच में पार्टीशन कर नया दरवाजा और टॉयलेट सीट लग जाए तो कम खर्च में समस्या हल हो जाएगी। इस पर अधीक्षक गुस्से में बोले “ठीक है पुरुष शौचालय में ताला लगाकर चाबी आपको दे देते हैं”।

कलेक्टर के जाने के बाद भी समस्या जस की तस रही।

0 वर्षा कुंजाम का एफबी पोस्ट

सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हुआ बदलाव

महिला अधिकारी ने कहा कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था। पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों का समर्थन मिला और प्रशासन पर दबाव बना।

अब उन्होंने खुशी जताते हुए नया पोस्ट लिखकर बताया है कि केन्द्रीय जेल दुर्ग के प्रशासनिक भवन में महिला शौचालय बना दिया गया है।

महिला अधिकारी ने कहा: “यह सफलता केवल मेरी नहीं, बल्कि आप सभी की है जिन्होंने आवाज से आवाज मिलाई। आप सभी का हृदय से आभार”।

अब क्या मांग?

महिला अधिकारी ने कहा कि यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं होती। जब तक देश के सभी राज्यों की सभी जेलों में महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं बन जाता, तब तक यह सफलता अधूरी है।

उन्होंने केन्द्र और राज्य सरकार से अपील की है कि महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेकर सभी जेलों में अलग महिला शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

साथ ही आम जनता से कहा: “किसी भी अन्याय को बर्दाश्त मत कीजिए। शुरुआत अकेले करनी पड़े तो भी डटे रहिए। हम सब आपके साथ हैं”।

कौन हैं वर्षा संतोष कुंजाम ?

छत्तीसगढ़ की सरकार, बेरोजगारों और यहां के प्रशासनिक अफसरों के लिए वर्षा संतोष कुंजाम कोई अपरिचित चेहरा नहीं हैं। दरअसल ये वहीं वर्षा डोंगरे हैं, जिन्होंने सीजी पीएससी–2003 में हुई भर्ती में गड़बड़ी को लेकर हाईकोर्ट में वाद दायर किया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि इस भर्ती में फिर से स्केलिंग पद्धति अपनाते हुए मेरिट के आधार पर लिस्ट निकाली जाए। 

हालांकि दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट चला गया और सालों बाद भी यह मामला लंबित है। दूसरी तरफ जो उम्मीदवार नायब तहसीलदार बनने के लायक नहीं थे, वे आज कलेक्टरी कर रहे हैं। 

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हद तो यह है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई और फैसला करने की बजाय याचिकाकर्ता वर्षा और रवींद्र सिंह आदि को इस मामले को लोक अदालत में सुलझाने का नोटिस दिया गया। इस नोटिस को लेकर वर्षा लिखती हैं:

“जब हमें लोक अदालत में इस गंभीर प्रकरण के सुलह के संबंध में आवश्यक कार्यवाही हेतु सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नोटिस की जानकारी मित्रों से प्राप्त हुआ तो हमें बहुत खेद हुआ कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा इतने गंभीर प्रकरण, जिसमें स्वयं हाईकोर्ट द्वारा छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा- 2003 एवं राज्य सरकार के भ्रष्टाचार को प्रमाणित करते हुए गंभीर तल्ख टिपण्णियों के साथ निर्णय दिया गया है एवं विगत 20 वर्षों से माननीय न्यायालय में न्याय प्राप्ति हेतु लंबित है, को लोक अदालत में सुलह के लायक समझा…!!!

वर्षा ने लिखा है “हमारा आज भी स्पष्ट अभिमत है कि न तो पहले हमने कोई आफर स्वीकार किया था, न ही अब करेंगे।अन्याय और अत्याचार के खिलाफ इस कानूनी लड़ाई का अंतिम निर्णय केवल सुप्रीम कोर्ट में ही होगा। इस प्रकरण में हमें पद, पैसा या प्रतिष्ठा कुछ नहीं चाहिए… केवल न्याय चाहिए। यदि न्याय के तराजू में हमें लोक सेवा का अवसर मिलता है तो स्वीकार्य होगा अन्यथा नहीं।”

वर्षा डोंगरे ने इस मामले में राज्य सरकार के खिलाफ भी टिप्पणी करते हुए लिखा है:

“राज्य सरकार से हमें कभी भी न्याय नहीं मिला इसलिए माननीय न्यायालय जाना पड़ा। भाजपा सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा 2003 के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया और उस भ्रष्टाचार के चयनित अधिकारियों को कांग्रेस सरकार के द्वारा प्रमोशन देकर IAS and IPS Award से सम्मानित कर यह अभिप्रमाणित कर दिया गया कि इस सिस्टम को केवल भ्रष्ट सेवक ही चाहिए… न कि ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ सेवक। इस पोस्ट को लिखने से मेरा एकमात्र अभिप्राय यह है कि हमारा अभिमत स्पष्ट है। अन्याय के विरूद्ध न्याय प्राप्ति के इस संघर्ष में हम तब तक डटे रहेंगे, जब तक फ़तह हासिल न हो जाऐ।”

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बहरहाल यह जुझारू महिला अधिकारी एक अन्य मामले को लेकर फिर चर्चा में है, और उसके वर्षों के एक छोटे से प्रयास के चलते उसकी पदस्थापना वाले दुर्ग जेल परिसर में महिला शौचालय का इंतजाम जेल प्रबंधन ने कर दिया है। मगर आज भी प्रदेश के अन्य कई सेंट्रल तथा अन्य जेलों में महिला शौचालयों का इंतजाम नहीं है, और वहां भी अफसरों को इस तरह की पहल करने की जरूरत है। अगर जरूरत के बाद भी वे ऐसा नहीं करते हैं तो यह उनके खुद के लिए शर्मनाक है। बताते चलें कि वर्षा के पति संतोष कुंजाम भी शासकीय सेवक हैं और विवाह के बाद से वर्षा डोंगरे अब वर्षा संतोष कुंजाम के नाम से जानी जाती हैं।

FAQ: जेल में महिला शौचालय का मामला 

सवाल 1: दुर्ग जेल में महिला शौचालय कब बना?

महिला अधिकारी के सोशल मीडिया पर पोस्ट करने और लोगों के समर्थन के बाद हाल ही में केन्द्रीय जेल दुर्ग में महिला शौचालय की व्यवस्था की गई।

सवाल 2: महिला अधिकारी को क्या समस्या थी?

प्रशासनिक भवन में महिला शौचालय न होने से उन्हें 3 साल से पुरुष शौचालय इस्तेमाल करना पड़ रहा था। इससे सुरक्षा और सम्मान दोनों का संकट था।

सवाल 3: समस्या का समाधान कैसे हुआ?

महिला अधिकारी ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा साझा की। लोगों के समर्थन और दबाव के बाद प्रशासन ने महिला शौचालय बना दिया।

सवाल 4: महिला अधिकारी की अब क्या मांग है?

उन्होंने कहा कि यह जीत सभी की है, लेकिन जब तक देश की सभी जेलों में महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं बनता, लड़ाई जारी रहेगी।

सवाल 5: महिला अधिकारी ने जनता से क्या अपील की?

उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। भले शुरुआत अकेले करनी पड़े, डटे रहें।