Nepal Flood: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में अलर्ट ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है.. आखिर बाढ़ आने से पहले प्रशासन को कैसे पता चलता है कि खतरा बढ़ रहा है? इसका जवाब सिर्फ आसमान में छाए बादलों या नदी का पानी बढ़ने से नहीं मिलता। मौसम का पूर्वानुमान, ऊपरी इलाकों में बारिश, नदी के जलस्तर, बैराजों पर पानी के दबाव और नदी में आने वाले बहाव को लगातार मॉनिटर किया जाता है। नेपाल की नदियों का पानी भारत की गंडक और दूसरी नदियों में पहुंचने के कारण यह निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
नेपाल में इस समय आई बाढ़ ने खतरे की गंभीरता बढ़ा दी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मौतों और लापता लोगों की संख्या लगातार बदल रही है, इसलिए अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में अंतर है। भारत में भी बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में नदियों की निगरानी बढ़ाई गई है। NDRF ने बिहार में 9 और उत्तर प्रदेश में 11 टीमें तैनात रखी हैं।
कैसे पता चलता है कि बाढ़ आने वाली है?
1. सबसे पहले देखा जाता है, ऊपर कितना पानी गिर रहा है
बाढ़ की चेतावनी का पहला बड़ा संकेत ऊपरी कैचमेंट में बारिश होती है। नदी का पानी अचानक बढ़ने से पहले यह देखा जाता है कि नदी के स्रोत और ऊपरी पहाड़ी इलाकों में कितनी और कितनी तेज बारिश हो रही है। उत्तर बिहार की कई नदियों का ऊपरी कैचमेंट नेपाल में है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, नेपाल में भारी बारिश से गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा जैसी नदियों में अचानक अधिक बहाव आ सकता है। यानी नेपाल में भारी बारिश भारत के लिए शुरुआती चेतावनी बन सकती है।
2. नदी का जलस्तर अचानक कितनी तेजी से बढ़ रहा है?
सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि नदी का पानी बढ़ रहा है या नहीं। निगरानी में यह भी देखा जाता है कि पानी कितनी तेजी से बढ़ रहा है। नदी के अलग-अलग हिस्सों में जलस्तर मापा जाता है। जब पानी चेतावनी या खतरे के स्तर की ओर तेजी से बढ़ता है तो प्रशासन को पहले से अलर्ट किया जा सकता है। नेपाल से आई बाढ़ के बाद गंडक में भी यही निगरानी बढ़ाई गई। बिहार के वाल्मीकिनगर बैराज पर 26 अगस्त की रात पानी का डिस्चार्ज करीब 1.50 लाख क्यूसेक तक पहुंचा था। बाद में इसमें कमी दर्ज की गई।
3. नदी में आने वाला पानी यानी डिस्चार्ज कितना है?
यह बाढ़ की भविष्यवाणी में बेहद अहम आंकड़ा है। नदी में किसी समय कितना पानी बह रहा है, इसे डिस्चार्ज के तौर पर मापा जाता है। पानी का बहाव तेजी से बढ़ने लगे तो नीचे के इलाकों में खतरे का अनुमान लगाया जा सकता है। यही वजह है कि बैराजों पर पानी के प्रवाह को लगातार देखा जाता है। जरूरत पड़ने पर फाटकों के संचालन और निचले इलाकों में अलर्ट जैसे फैसले लिए जाते हैं।
4. बैराज के गेट क्यों खोले जाते हैं?
बैराज के गेट खोलना अपने आप में बाढ़ आने का संकेत नहीं है। कई बार बढ़ते पानी के दबाव और प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए भी गेट संचालित किए जाते हैं। नेपाल से पानी आने के बाद बिहार के गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोले गए थे। इसका उद्देश्य बढ़े हुए पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना और बैराज पर दबाव को संभालना था। इसलिए बैराज के गेटों की स्थिति भी बाढ़ निगरानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
5. मौसम का पूर्वानुमान और नदी का डेटा साथ देखा जाता है
बाढ़ का अलर्ट केवल नदी देखकर जारी नहीं होता। मौसम विभाग से मिलने वाला बारिश का पूर्वानुमान और नदी के जलस्तर तथा डिस्चार्ज का डेटा एक साथ देखा जाता है। यही वजह है कि किसी इलाके में अभी पानी सामान्य होने के बावजूद प्रशासन अलर्ट जारी कर सकता है। अगर ऊपर भारी बारिश जारी है और उस पानी के नीचे की ओर आने की संभावना है, तो कुछ घंटे बाद स्थिति बदल सकती है।
6. क्या आम लोगों को भी पहले से अलर्ट मिल सकता है?
भारत में SACHET National Disaster Alert Portal के जरिए आपदा संबंधी चेतावनियां जारी की जाती हैं। यह पोर्टल IMD, Central Water Commission और National Disaster Management Authority जैसी एजेंसियों से मिलने वाले अलर्ट को लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था का हिस्सा है। इसमें मोबाइल और ब्राउजर के जरिए अलर्ट प्राप्त करने की सुविधा भी है। यानी बाढ़ के समय सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या अफवाहों पर निर्भर रहने के बजाय आधिकारिक अलर्ट और स्थानीय प्रशासन की सूचना देखना ज्यादा जरूरी है।
नेपाल की बाढ़ का असर बिहार-यूपी तक क्यों पहुंच सकता है?
नेपाल और उत्तर भारत की नदी प्रणालियां आपस में जुड़ी हुई हैं। खास तौर पर नेपाल के ऊपरी इलाकों में भारी बारिश या अचानक आने वाले फ्लैश फ्लड का असर नीचे की ओर बहने वाली नदियों पर पड़ सकता है। इसी वजह से बिहार के पश्चिम चंपारण सहित कई जिलों और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई। गंडक और नारायणी नदी प्रणाली के जलस्तर पर खास नजर रखी जा रही है।
बाढ़ आने से पहले इन संकेतों को गंभीरता से लें?
- नदी का पानी तेजी से बढ़ना
- प्रशासन की ओर से नदी किनारे जाने पर रोक
- बैराज के गेटों के संचालन की सूचना
- लगातार भारी बारिश की चेतावनी
- निचले इलाकों को खाली कराने का निर्देश
- मोबाइल पर आधिकारिक आपदा अलर्ट
बाढ़ कई बार इतनी तेजी से आती है कि स्थानीय संकेत मिलने तक निकलने का समय बहुत कम बचता है। इसलिए प्रशासन की चेतावनी मिलने के बाद इंतजार करने के बजाय सुरक्षित स्थान की ओर जाना ज्यादा जरूरी है।


