Prashant Kishor reacts to education minister statement on Tejashwi Yadav
Prashant Kishor reacts to education minister statement on Tejashwi Yadav

Bihar Politics Tejashwi Yadav Prashant Kishor: बिहार की राजनीति में इन दिनों नेताओं की शैक्षणिक योग्यता को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी द्वारा विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को 10वीं की परीक्षा पास करने की नसीहत दिए जाने के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने तीखा पलटवार किया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर तेजस्वी यादव को 10वीं की परीक्षा पास करने की सलाह दी जा रही है, तो यही कसौटी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी लागू होनी चाहिए।

शिक्षा मंत्री की नसीहत पर पीके का पलटवार

प्रशांत किशोर ने शिक्षा मंत्री के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी यादव अकेले ही परीक्षा क्यों दें? मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी उनके साथ 10वीं की परीक्षा देनी चाहिए। पीके ने कहा कि अगर शिक्षा मंत्री को लगता है कि किसी नेता की शैक्षणिक योग्यता जनता के सामने साबित होनी चाहिए, तो यह नियम सिर्फ विपक्ष के नेता के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने सत्तापक्ष के नेताओं को भी इसी कसौटी पर परखे जाने की बात कही।

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कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री को सलाह देने की मांग

प्रशांत किशोर ने शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अगली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी 10वीं की परीक्षा देने की सलाह देनी चाहिए। उनका तंज साफ था कि अगर तेजस्वी यादव से अपनी शैक्षणिक योग्यता साबित करने को कहा जा रहा है, तो मुख्यमंत्री को भी उसी प्रक्रिया से गुजरना चाहिए। पीके ने दोनों नेताओं को एक साथ परीक्षा देने की बात कही।

छात्रों के मुद्दे पर शुरू हुआ विवाद

दरअसल, यह पूरा विवाद छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और उसके समर्थन को लेकर शुरू हुआ। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन करने को लेकर तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें पहले अपनी 10वीं की परीक्षा पास करने की सलाह दी थी। मंत्री के इसी बयान पर प्रशांत किशोर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षा और योग्यता का सवाल उठाया जा रहा है, तो इसे राजनीतिक सुविधा के हिसाब से नहीं देखा जाना चाहिए।

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सत्तापक्ष-विपक्ष दोनों के लिए एक नियम

प्रशांत किशोर ने समान कसौटी की वकालत करते हुए कहा कि शिक्षा और योग्यता के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं के लिए अलग-अलग मापदंड नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी नेता की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो सरकार में बैठे नेताओं को भी उसी पैमाने पर परखा जाना चाहिए। पीके ने इसे बिहार की जनता और युवाओं के भरोसे से जोड़ते हुए दोनों नेताओं की योग्यता को लेकर सवाल खड़ा किया।

बयानबाजी से गरमाई बिहार की सियासत

प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ शिक्षा मंत्री का तेजस्वी यादव पर हमला है, तो दूसरी तरफ प्रशांत किशोर ने उसी तर्क को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर लागू करने की मांग कर दी है। अब देखना होगा कि शिक्षा मंत्री या मुख्यमंत्री की ओर से प्रशांत किशोर के इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल, 10वीं की परीक्षा और शैक्षणिक योग्यता का मुद्दा बिहार की सियासत में नया राजनीतिक तंज बन गया है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।