रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा संगठनात्मक स्तर पर मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति के बाद प्रदेश की राजनीति में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव द्वारा सात प्रमुख मोर्चों के प्रभारियों की सूची जारी करने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। विवाद का मुख्य केंद्र महिला मोर्चा का प्रभारी एक पुरुष नेता को बनाया जाना है। इस नियुक्ति को लेकर कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी पर महिला नेतृत्व को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए तीखा तंज कसा है।
सुभाष तिवारी को मिली महिला मोर्चा की कमान
गौरतलब है कि सोमवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने संगठन को मजबूती देने के उद्देश्य से भाजपा के विविध घटकों के प्रदेश प्रभारियों की आधिकारिक सूची जारी की थी। इस सूची में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग मोर्चों की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, सूची सामने आते ही महिला मोर्चा के प्रभारी पद पर हुए नाम के ऐलान ने सभी का ध्यान खींचा। पार्टी ने वरिष्ठ नेता सुभाष तिवारी को महिला मोर्चा का प्रभारी नियुक्त किया है, जिस पर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
कांग्रेस का तीखा तंज ‘क्या बीजेपी में एक भी काबिल महिला नेता नहीं?
भाजपा द्वारा महिला मोर्चा की कमान एक पुरुष नेता को सौंपे जाने के फैसले पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी के सांगठनिक ढांचे और नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बेहद हैरान करने वाला फैसला है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या भारतीय जनता पार्टी जैसी बड़ी पार्टी के पास अपनी ही महिला विंग का मार्गदर्शन करने के लिए एक भी सक्षम या योग्य महिला नेता नहीं बची है? किसी महिला को जिम्मेदारी देने के बजाय पुरुष नेता की नियुक्ति करना पार्टी की अंदरूनी स्थिति को दर्शाता है।
महिला सशक्तिकरण के दावों पर उठे गंभीर सवाल
कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा मंचों और भाषणों में महिलाओं को प्राथमिकता देने और ‘महिला सशक्तिकरण’ का बड़ा-बड़ा दावा करती है। लेकिन जब संगठन में वास्तव में महिलाओं को नेतृत्व देने का समय आता है, तो पार्टी पीछे हट जाती है। कांग्रेस के अनुसार, महिला मोर्चा में ही किसी महिला को प्रभारी न बनाना यह साबित करता है कि बीजेपी के दावे केवल कागजी और खोखले हैं। वास्तव में पार्टी महिलाओं को आगे बढ़ाने के प्रति गंभीर नहीं है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा, क्या भाजपा के पास नहीं थी कोई महिला ?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर पार्टी को महिला मोर्चा के लिए महिला प्रभारी की जगह पुरुष नेता का चयन क्यों करना पड़ा। कांग्रेस का कहना है कि सच तो यह है कि बीजेपी नेता अपनी ही पार्टी में महिला मोर्चा का प्रभार संभालने के लिए किसी महिला नेता की खोज तक नहीं कर पाए। विपक्ष का दावा है कि इस फैसले से बीजेपी का महिला विरोधी और पुरुष-प्रधान दृष्टिकोण सार्वजनिक रूप से सामने आ गया है।
संगठन के फैसले पर सियासी घमासान जारी
मोर्चा प्रभारियों की घोषणा के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब सोशल मीडिया और राजनीतिक बहसों में जोर पकड़ रहा है। कांग्रेस जहां इसे महिला सम्मान और अवसरों की उपेक्षा से जोड़कर बीजेपी को घेर रही है, वहीं भाजपा खेमे में इस नियुक्ति के सांगठनिक रणनीतिक पहलुओं को लेकर मंथन जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति और अधिक गरमाने के आसार हैं, क्योंकि विपक्ष इसे आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों में भाजपा के खिलाफ एक प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहा है।


