Supreme Court Order On NEET UG Protest: नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142) के तहत मिले अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए दिल्ली और चार अन्य राज्यों में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने का आदेश जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले और केंद्र सरकार के सकारात्मक रुख को देखते हुए ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) ने आगामी 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना राष्ट्रव्यापी मार्च वापस ले लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले पर अहम सुनवाई की।
किन-किन राज्यों में रद्द होंगी प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ-साथ चार प्रमुख राज्यों में दर्ज आपराधिक मामले समाप्त कर दिए जाएंगे।
प्रभावित राज्य: दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार।
घटना का समय: ये सभी मामले 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र आंदोलनों से जुड़े थे।
सरकारों की सहमति: दिल्ली पुलिस और संबंधित चार राज्य सरकारों ने खुद कोर्ट से अनुरोध किया था कि अनुच्छेद 142 का उपयोग कर छात्रों के हित में इन मामलों को समाप्त किया जाए।
पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा: केंद्र ने मांगा 3 महीने का समय
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ हुई बातचीत में दिए गए वचनों पर पूरी तरह कायम है।
उन्होंने बताया कि नीट आंदोलन के दौरान जिन छात्रों ने मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया, उनके परिवारों को केंद्र सरकार मुआवजा प्रदान करेगी। मुआवजे की प्रक्रिया, पात्रता और वितरण की रूपरेखा तय करने के लिए राज्य सरकारों और हितधारकों से विचार-विमर्श किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केंद्र ने तीन महीने का समय मांगा है।
2873 लोगों पर क्यों होगी नई एफआईआर और कानूनी कार्रवाई?
एक तरफ जहां प्रदर्शनकारी छात्रों को राहत मिली है, वहीं 2873 लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति भी दी गई है।
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट के समक्ष स्पष्ट किया कि जांच में 2873 ऐसे असामाजिक और बाहरी तत्वों की पहचान हुई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal History) रहा है। ये लोग छात्रों के आंदोलन का आड़ लेकर अराजकता फैला रहे थे। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने इन 2873 व्यक्तियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि स्पष्ट हो सके कि वास्तविक छात्रों पर कोई आंच न आए।
सीजेपी (CJP) ने वापस लिया 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च
आंदोलन की अगुवाई कर रहे संगठन ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के प्रतिनिधि सौरव दास ने अदालत में अपना पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मुआवजे के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के एफआईआर रद्द करने के संवेदनशील निर्णय को देखते हुए संगठन ने 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च रद्द करने का फैसला लिया है। मुख्य न्यायाधीश ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया और दोनों पक्षों के परिपक्व रवैये की सराहना की।
बातचीत से हल हो सकते हैं जटिल मुद्दे: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मामले का निपटारा करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष आपसी विश्वास बनाए रखें और खुले दिमाग से मेज पर बैठें, तो किसी भी कठिन समस्या का समाधान संवाद के जरिए निकाला जा सकता है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कोर्ट के विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारी छात्र आपस में विरोधी नहीं हैं। दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता रचनात्मक रही, जिसके फलस्वरूप यह सौहार्दपूर्ण समाधान संभव हो पाया है।
(FAQs)
Q1. सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शनकारियों के संदर्भ में क्या फैसला सुनाया है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए नीट-यूजी प्रदर्शन के दौरान दिल्ली और 4 राज्यों में दर्ज सभी एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है।
Q2. प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर किन-किन राज्यों में रद्द की गई हैं?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज एफआईआर रद्द की गई हैं।
Q3. नीट आंदोलन के दौरान प्रभावित परिवारों के मुआवजे पर केंद्र सरकार का क्या रुख है?
उत्तर: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार नीट प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देगी। इसके लिए 3 महीने के भीतर रूपरेखा तैयार की जाएगी।
Q4. किन 2873 लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी गई है?
उत्तर: जिन 2873 लोगों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और जिन्होंने आंदोलन के दौरान गड़बड़ी की, उनके खिलाफ केंद्र सरकार को नई एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की इजाजत दी गई है।
Q5. सीजेपी (CJP) ने 5 सितंबर का अपना प्रस्तावित मार्च क्यों वापस लिया?
उत्तर: केंद्र सरकार के सकारात्मक रुख, मुआवजे के भरोसे और सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द किए जाने के फैसले के बाद सीजेपी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना मार्च वापस ले लिया।


