Mineral Blocks Auction Roadshow: नवा रायपुर में आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी के रोड शो को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान छिड़ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस पूरी कवायद को चंद उद्योगपतियों के इशारे पर राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की लूट की गति बढ़ाने वाला करार दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें लिथियम, नीकल, क्रोमियम और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खुली नीलामी के नाम पर अपने कॉरपोरेट मित्रों को अनुचित फायदा पहुंचाने का षड्यंत्र रच रही हैं।
एमएमडीआर संशोधन अधिनियम से राज्यों के राजस्व पर चोट
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा संसद में बिना विस्तृत चर्चा के पारित कराए गए एमएमडीआर (MMDR) संशोधन अधिनियम के माध्यम से राज्यों के संवैधानिक अधिकारों को सीमित किया गया है।
इस कानून के जरिए राज्यों को मिलने वाले अतिरिक्त कर, सेस या लेवी लगाने के अधिकारों पर बंदिशें लगाई गई हैं। नवा रायपुर में आयोजित नीलामी रोड शो उसी कॉरपोरेट परस्त नीति का हिस्सा है। इससे छत्तीसगढ़ जैसे समृद्ध और खनिज प्रचुर राज्य के खजाने को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा।
खदानों में 24,065 करोड़ के राजस्व नुकसान का दावा
दीपक बैज ने रायगढ़ जिले के तमनार स्थित गारे पेल्मा IV/1 और IV/7 कोयला खदानों का आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि 2015 में जब पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया हुई थी, तब 1,585 रुपये से 2,619 रुपये प्रति टन तक की बोलियां मिली थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2020 में कोविड महामारी के संकट के दौरान नीतियों में अचानक बदलाव किया गया और नीलामी के मापदंडों को इस तरह बदला गया कि खदानें महज 342.25 रुपये प्रति टन की दर से (लगभग 78% छूट के साथ) जिंदल समूह को दे दी गईं। इसके कारण छत्तीसगढ़ को संभावित रूप से 24,065 करोड़ रुपये के विशाल राजस्व का नुकसान झेलना पड़ा है।
तमनार में जल, जंगल और जमीन का विनाश
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि तमनार क्षेत्र केवल एक सामान्य व्यावसायिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक संसाधनों की खुली बिकवाली का उदाहरण बन चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ग्राम सभाओं की वैध सहमति और पर्यावरणीय मानकों को दरकिनार कर हो रहे खनन के कारण स्थानीय आदिवासी समाज तीव्र विरोध कर रहा है। जल, जंगल और जमीन तबाह हो रहे हैं और आदिवासियों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज से जांच कराने, नीलामी रद्द करने की मांग
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने मांग की है कि:
गारे पेल्मा IV/1 और IV/7 कोयला खदानों की 2020 में हुई नीलामी प्रक्रिया की उच्चतम न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में निष्पक्ष जांच कराई जाए।
राज्य के खजाने को क्षति पहुंचाने वाली इस नीलामी को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
तमनार क्षेत्र में ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों को बहाल किया जाए और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
सड़क से संसद तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
दीपक बैज ने कहा कि जो 24,065 करोड़ रुपये राज्य के किसानों, आदिवासियों, युवाओं के कल्याण और विकास योजनाओं में खर्च हो सकते थे, उन्हें कॉरपोरेट मुनाफे में बदल दिया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों, जनहित और राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर संसद तक अपना संघर्ष और विरोध जारी रखेगी।
(FAQs)
Q1. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मिनरल नीलामी रोड शो को लेकर क्या आरोप लगाया है?
उत्तर: दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि मिनरल नीलामी रोड शो छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक खनिजों को कौड़ियों के भाव बेचकर उद्योगपतियों और कॉरपोरेट मित्रों को फायदा पहुंचाने और राज्य के संसाधनों को लूटने की कवायद है।
Q2. एमएमडीआर (MMDR) संशोधन अधिनियम को लेकर कांग्रेस का क्या ऐतराज है?
उत्तर: कांग्रेस का कहना है कि एमएमडीआर संशोधन अधिनियम के जरिए राज्यों के खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर, सेस या लेवी लगाने की शक्तियों को सीमित कर दिया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के राजस्व को नुकसान होगा।
Q3. गारे पेल्मा IV/1 और IV/7 खदानों में कितने रुपये के राजस्व नुकसान का आरोप लगाया गया है?
उत्तर: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 2020 में नीतियों में बदलाव कर 78 प्रतिशत छूट के साथ खदानें दिए जाने से राज्य को 24,065 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित राजस्व का नुकसान हुआ है।
Q4. रायगढ़ के तमनार क्षेत्र को लेकर कांग्रेस की प्रमुख मांगें क्या हैं?
उत्तर: कांग्रेस की मांग है कि 2020 की नीलामी प्रक्रिया की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से जांच हो, विवादित नीलामी को रद्द किया जाए, ग्राम सभाओं के अधिकार बहाल हों और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाए।
Q5. दीपक बैज के अनुसार 2015 की तुलना में 2020 में नीलामी दरों में क्या अंतर आया था?
उत्तर: दीपक बैज के अनुसार 2015 की प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी में 1,585 रुपये से 2,619 रुपये प्रति टन तक बोली लगी थी, जबकि 2020 में इसे महज 342.25 रुपये प्रति टन की प्रभावी दर पर दे दिया गया।


