डिजिटल डेस्क: दुर्गापुरा पिपराली के किसान संजय यादव ने प्राकृतिक खेती के दम पर अपने खेत में पांच अलग-अलग रंगों का मक्का उगाकर एक सफल मॉडल तैयार किया है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर जैविक संसाधनों को अपनाने से उनकी खेती की बचत 30 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
रंग-बिरंगे मक्के के लिए पेटेंट का आवेदन करने वाले संजय के इस मॉडल को देखने और सीखने के लिए अब दूसरे राज्यों से भी किसान उनके खेत पर पहुंच रहे हैं।
2 साल की रिसर्च और 5 रंगों का मक्का
प्राकृतिक खेती और मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने के बाद संजय ने बीजों और तकनीकों पर करीब दो साल तक शोध किया। इसके बाद उन्होंने पांच रंगों का मक्का उगाना शुरू किया। इस मक्के के आकर्षक रूप और गुणवत्ता के कारण होटलों और रेस्टोरेंट से इसकी मांग आने लगी है। अब उन्होंने इस पांच रंगों वाले मक्के के लिए पेटेंट का आवेदन भी जमा किया है।
रसायनों से दूरी, बचत में 70 फीसदी का उछाल
संजय बताते हैं कि जब वे एक हेक्टेयर खेत में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल करते थे, तब लागत के बाद महज 30 प्रतिशत बचत होती थी। रसायनों का इस्तेमाल बंद कर उन्होंने देसी संसाधनों से खाद और दवाइयां बनानी शुरू कीं। इससे लागत काफी घट गई और बचत बढ़कर करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई।
पीएम मोदी को दिखाया अपना खेती मॉडल
अक्टूबर 2025 में धनधान्य योजना के उद्घाटन के मौके पर संजय यादव को दिल्ली बुलाया गया था। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपने प्राकृतिक खेती मॉडल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे अपने फार्म पर देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से जीवामृत, घनजीवामृत, वर्मी कंपोस्ट और सरल कंपोस्ट तैयार करते हैं। इससे बाजार से खाद खरीदने का खर्च बच जाता है।
घर पर ही तैयार करते हैं जैविक कीटनाशक
फसल में कीट नियंत्रण के लिए संजय बाजार के महंगे कीटनाशकों की जगह घर पर ही जैविक घोल तैयार करते हैं। वे अग्नि अस्त्र, ब्रह्मास्त्र, दसपर्णी और पंचगव्य का इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है कि खेत में मौजूद संसाधनों का उपयोग करने से लागत घटती है और मिट्टी की सेहत बनी रहती है।
एक ही खेत में विविध फसलें और बीज उत्पादन
दुर्गापुरा पिपराली स्थित उनके कृषि फार्म पर मिर्च, टमाटर, भिंडी, लौकी, करेला, बैंगन, फूलगोभी, ब्रोकली और मूली जैसी सब्जियां उगाई जाती हैं। मिश्रित खेती के तहत हल्दी और काली हल्दी का उत्पादन भी किया जा रहा है। मसाला फसलों में राई और सौंफ शामिल हैं। संजय अपने फार्म पर बीज उत्पादन कर उन्हें अन्य किसानों को भी उपलब्ध करवाते हैं।
सब्जियां, घी और मशरूम से लाखों की कमाई
संजय सप्ताह में रविवार और बुधवार को शहर में ग्राहकों को सीधे सब्जियां बेचते हैं, जिससे सालाना 3 से 4 लाख रुपये की आय होती है। उनके पास पांच देसी गायें हैं, जिनके दूध से घी बनाकर वे 3 से 4 लाख रुपये अतिरिक्त कमाते हैं। इसके अलावा बटन, ओयस्टर और मिल्की मशरूम के उत्पादन से सालाना 5 लाख रुपये से अधिक की कमाई होती है। उनका फार्म अब प्रशिक्षण केंद्र बन चुका है, जहां वे करीब 150 किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक सिखा चुके हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र1: संजय यादव ने 5 रंगों का मक्का कैसे उगाया?
उत्तर: प्राकृतिक खेती और मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने के बाद करीब दो साल तक अलग-अलग तकनीकों और बीजों पर रिसर्च करके उन्होंने यह मक्का उगाया।
प्र2: संजय यादव कीट नियंत्रण के लिए किन देसी उत्पादों का उपयोग करते हैं?
उत्तर: वे घर पर ही तैयार किए गए अग्नि अस्त्र, ब्रह्मास्त्र, दसपर्णी और पंचगव्य जैसे प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग करते हैं।
प्र3: संजय यादव की सालाना आय के मुख्य स्रोत क्या हैं?
उत्तर: सब्जियों की बिक्री से 3-4 लाख रुपये, देसी गाय के घी से 3-4 लाख रुपये और मशरूम उत्पादन से 5 लाख रुपये से अधिक की सालाना कमाई होती है।
प्र4: संजय यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कब मुलाकात की थी?
उत्तर: अक्टूबर 2025 में दिल्ली में आयोजित धनधान्य योजना के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की थी।
प्र5: संजय यादव के फार्म पर कौन-कौन से मशरूम उगाए जाते हैं?
उत्तर: उनके फार्म पर बटन, ओयस्टर और मिल्की मशरूम का उत्पादन किया जाता है।


