: Genetically modified pig kidney transplant being performed on a human patient in a modern medical facility
Genetically modified pig kidney helped a kidney failure patient survive until a human donor kidney became available.

Pig Kidney Transplant: दुनियाभर में अंग प्रत्यारोपण के लिए डोनर अंगों की कमी आज भी बड़ी चिकित्सा चुनौती बनी हुई है। भारत में भी हर साल बड़ी संख्या में मरीज जरूरी अंग नहीं मिलने के कारण इलाज का इंतजार करते रहते हैं। खासकर किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए डायलिसिस पर लंबे समय तक निर्भर रहना कठिन और जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे समय में मेडिकल साइंस से सामने आया एक प्रयोग नई उम्मीद जगाता है।

अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल ब्रिघम के डॉक्टरों ने 66 वर्षीय टिम एंड्रयूज में आनुवंशिक रूप से बदली गई सुअर की किडनी प्रत्यारोपित की। यह ट्रांसप्लांट 25 जनवरी 2025 को किया गया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि प्रत्यारोपित किडनी ने मरीज के शरीर में तुरंत काम करना शुरू कर दिया और करीब 271 दिनों तक काम करती रही।

टिम एंड्रयूज की हालत बेहद गंभीर थी
टिम एंड्रयूज टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित थे और उनकी किडनी की बीमारी अंतिम चरण तक पहुंच गई थी। उनके सामने इंसानी डोनर किडनी मिलने के लिए लंबा इंतजार करने की चुनौती थी। इस स्थिति में नियमित डायलिसिस के साथ ज्यादा समय तक इंतजार करना उनके स्वास्थ्य के लिए मुश्किल हो सकता था। इसी परिस्थिति में डॉक्टरों ने जेनेटिकली मॉडिफाइड पिग किडनी का विकल्प अपनाया।

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सुअर की किडनी में किए गए थे 69 आनुवंशिक बदलाव
वैज्ञानिकों ने जिस सुअर की किडनी का इस्तेमाल किया, उसके आनुवंशिक ढांचे में 69 बदलाव किए गए थे। इसका उद्देश्य अंग को मानव शरीर के लिए ज्यादा अनुकूल बनाना और प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा अंग को अस्वीकार किए जाने तथा संक्रमण से जुड़े जोखिमों को कम करना था। यह प्रयोग जेनोट्रांसप्लांटेशन यानी पशु से इंसान में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

271 दिन तक बिना डायलिसिस के मिली राहत
ट्रांसप्लांट के बाद किडनी ने काम करना शुरू किया और एंड्रयूज करीब नौ महीने तक इसके सहारे रहे। इस अवधि में उन्हें डायलिसिस से राहत मिली और वह रोजमर्रा के कई काम कर सके। खाना बनाना और घर की सफाई जैसी सामान्य गतिविधियां उनके लिए इस उपचार की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। उनके लिए यह प्रयोग सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर बन गया।

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क्यों निकालनी पड़ी सुअर की किडनी?
हालांकि यह प्रयोग लंबे समय तक सफल रहा, लेकिन बाद में प्रत्यारोपित किडनी की रक्त वाहिकाओं में क्षति के संकेत दिखाई देने लगे। करीब 271 दिनों के बाद डॉक्टरों को सुअर की किडनी निकालनी पड़ी। इसके बाद कुछ समय के लिए एंड्रयूज को दोबारा डायलिसिस का सहारा लेना पड़ा। यानी यह किडनी स्थायी समाधान के बजाय एक अंतरिम चिकित्सा विकल्प के रूप में सामने आई।

इंसानी किडनी मिलने तक बना ‘पुल’
इस मामले की सबसे अहम खासियत यही है कि सुअर की किडनी ने एक तरह के ‘ब्रिज ट्रांसप्लांट’ की भूमिका निभाई। इसका मतलब है कि इस अंग ने मरीज को उस अवधि में सहारा दिया, जब तक उपयुक्त इंसानी डोनर किडनी उपलब्ध नहीं हो गई। बाद में एंड्रयूज को इंसानी डोनर की किडनी मिली और उसे प्रत्यारोपित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार नई किडनी अब अच्छी तरह काम कर रही है।

क्या भविष्य में मरीजों को मिल सकता है नया विकल्प?
यह प्रयोग भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। यदि आनुवंशिक रूप से बदली गई पशु किडनी को ज्यादा लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से काम कराने में सफलता मिलती है, तो यह उन मरीजों के लिए अस्थायी विकल्प बन सकती है जिन्हें इंसानी डोनर अंग मिलने में लंबा समय लगता है। हालांकि इसे व्यापक चिकित्सा उपयोग में लाने से पहले सुरक्षा, संक्रमण, अस्वीकृति और लंबे समय के प्रभावों पर और शोध जरूरी होगा।

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अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में नई उम्मीद
एंड्रयूज के मामले ने यह दिखाया है कि जेनोट्रांसप्लांटेशन अब केवल कल्पना या विज्ञान-कथा का विषय नहीं रह गया है। सुअर की किडनी का 271 दिनों तक काम करना शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि इस तकनीक को आम मरीजों तक पहुंचने में अभी कई वैज्ञानिक और नियामकीय चुनौतियां हैं, लेकिन अंगों की कमी से जूझ रही दुनिया के लिए यह शोध भविष्य की एक नई दिशा जरूर दिखाता है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।