नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग के दिग्गज और देश के जाने-माने कारोबारी और एस्सेल ग्रुप (Essel Group) के संस्थापक सुभाष चंद्रा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। बता दें कि, भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग के दिग्गज रहे हैं सुभाष चंद्रा देश के पहले निजी सैटेलाइट न्यूज चैनल के संस्थापक हैं।
इसके अलावा, वह लंबे समय तक राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। मीडिया, पैकेजिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और एजुकेशन सेक्टर में उनके बड़े कारोबार रहे हैं, हालांकि पिछले कुछ वर्षों से वित्तीय संकट और ऋणदाताओं के साथ विवादों के चलते उनका नाम चर्चा में रहा है।
क्या है मामला
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LIC HFL) की शिकायत पर दर्ज इस प्राथमिकी के अनुसार, चंद्रा पर फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए कुल संपत्ति (Net Worth) प्रमाण पत्रों के आधार पर 980 करोड़ रुपये के दो बड़े ऋण स्वीकृत कराने का गंभीर आरोप है। इन कर्जों के भुगतान में चूक होने के कारण ऋणदाता कंपनी को 1,322 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम नुकसान हुआ है।
CBI की प्राथमिकी के मुताबिक,पूरा मामला दो प्रमुख ऋण सुविधाओं से जुड़ा है। जिसमें वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को 500 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा दी गई थी, जिसमें पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड सह-ऋणकर्ता (Co-borrower) थी।
दूसरा आरोप डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। इस फर्म को 480 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया, जिसमें स्पिरिट इंफ्रा पॉवर एंड मल्टी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड सह-ऋणकर्ता थी।
सीबीआई की जांच में यह बात सामने आई है कि सुभाष चंद्रा ने इन उधार लेने वाली कंपनियों और उनके निदेशकों के साथ मिलकर एलआईसीएचएफएल के साथ सुनियोजित मिलीभगत की। इसके जरिए ऋण स्वीकृत करवाए गए और बाद में उन पैसों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
फर्जी संपत्ति प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल
एलआईसीएचएफएल के अनुसार, सुभाष चंद्रा की ओर से डीआईएम एंड कंपनी द्वारा 28 मार्च 2018 को जारी प्रमाण पत्र में उनकी कुल संपत्ति लगभग 59,000 करोड़ रुपये दर्शाई गई थी। वहीं, एमपीजे एंड कंपनी नामक चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म द्वारा 6 जुलाई 2018 को जारी दूसरे प्रमाण पत्र में उनकी कुल संपत्ति 40,562 करोड़ रुपये बताई गई थी। इन्हीं दावों के आधार पर ऋण स्वीकृत किए गए थे, जो बाद में ‘डिफॉल्ट’ (एनपीए) हो गए।


