Landmark High Court ruling: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने RTI को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। अपने खिलाफ हुई विभागीय जांच और बर्खास्तगी के आधार बने दस्तावेज RTI के जरिए मांगना कर्मचारी का वैध अधिकार है, अगर वह उनका उपयोग अपने बचाव के लिए करना चाहता है।
जांजगीर-चांपा निवासी अकरम खान फैमिली कोर्ट में ड्राइवर था। कदाचार के 7 आरोपों पर उसके खिलाफ दो विभागीय जांच हुई, जिसके बाद 5 जनवरी 2021 को प्रधान न्यायाधीश ने उसकी सेवा समाप्त कर दी। अकरम ने कहा — बचाव का उचित मौका नहीं दिया, दस्तावेज मांगे तो नहीं दिए।
फैमिली कोर्ट द्वारा बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी।
बचाव के लिए मांगी थी विभागीय जांच की पूरी नोटशीट
बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए अकरम खान ने अपनी याचिका में कहा है, बर्खास्तगी आदेश जारी करने से पहले फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने निष्पक्ष और उचित बचाव का अवसर नहीं दिया। बर्खास्तगी से पहले और विभागीय जांच के दौरान, उसको अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया।
जनसूचना अधिकारी से लेकर सूचना आयोग तक ने खारिज किया
प्रभावी बचाव व जवाब पेश दावा पेश करने के लिए विभागीय जांच से संबंधित दस्तावेज मांगे तो उसे दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। दस्तावेज ना देने पर सूचना के अधिकार के तहत उसने दस्तावेज देने की मांग की। इसके बाद भी नहीं मिला। इसके बाद, जनसूचना अधिकारी के समक्ष आवेदन किया, जिसे 15 जनवरी 2021 को खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ प्रथम अपील की गई, लेकिन 10 मार्च 2021 को प्रथम अपील भी खारिज हो गई। इसके बाद, आरटीआई अधिनियम की धारा 19(3) के तहत छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के समक्ष दूसरी अपील की। राज्य सूचना आयोग ने 28 जनवरी 2022 को दूसरी अपील खारिज कर दी। सूचना देने से इनकार करने के लिए अधिकारियों और सूचना आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(सी) और 8(1)(जे) का हवाला दिया था।
अकरम ने RTI लगाई। जनसूचना अधिकारी ने 15 जनवरी 2021 को, प्रथम अपील 10 मार्च 2021 को और राज्य सूचना आयोग ने 28 जनवरी 2022 को धारा 8(1)(C) और 8(1)(J) का हवाला देकर दूसरी अपील खारिज कर दी। इसके बाद दो याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर हुईं।
हाईकोर्ट ने तीनों आदेश किये खारिज
कोर्ट ने कहा — मांगी गई जानकारी न तो तीसरे पक्ष की गोपनीय सूचना है, न ऐसी व्यक्तिगत जानकारी जिसे धारा 8(1)(J) के तहत रोका जा सके। यह सीधे उसकी अपनी विभागीय कार्रवाई से जुड़ी है, तीसरे व्यक्ति की निजता का बहाना नहीं चलेगा। धारा 8(1)(C) के तहत रोकना कानून की मंशा के विपरीत है। जनसूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय प्राधिकारी और सूचना आयोग के तीनों आदेश खारिज, शुल्क लेकर पूरी नोटशीट देने का निर्देश किया। इसके लिए याचिकाकर्ता को निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। कोर्ट ने जानकारी उपलब्ध कराने 30 दिन का समय तय कर दिया है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सवाल 1. हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
जवाब: कर्मचारी को अपनी विभागीय जांच और बर्खास्तगी के दस्तावेज RTI में मांगना वैध अधिकार है, 30 दिन में देना होगा।
सवाल 2. किसका केस था?
जवाब: जांजगीर फैमिली कोर्ट के बर्खास्त ड्राइवर अकरम खान का, जिसे 5 जनवरी 2021 को बर्खास्त किया गया था।


