कोरोना महामारी के दौर में भी प्रदेश के 1072 चिकित्सा संस्थानों के पास नहीं है बायो मेडिकल वेस्ट लाइसेंस, पर्यावरण मंत्री हुए सख्त
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रायपुर। कोरोना महामारी के दौर में भी छत्तीसगढ़ में अब भी 1,072 संस्थान है जहां नर्सिंग होम एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा है। इन संस्थानों ने बायो मेडिकल वेस्ट का लाइसेंस नहीं लिया है। राज्य में अभी निजी चिकित्सा संस्थानों की संख्या 3,069 है। जिनमें से अब तक 1997 निजी चिकित्सा संस्थानों ने ही लाइसेंस लिया है।

पर्यावरण संरक्षण मंडल के अनुसार इस नियम के दायरे में सभी निजी क्लिनिक, ब्लड बैंक, आयुर्वेदिक क्लिनिक और पैथालाजी लैब शामिल हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने इसको लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पर्यावरण मंडल के अफसरों को ऐसे अस्पतालों का लाइसेंस महीनेभर के भीतर सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

मंत्री अकबर ने शनिवार को अपने निवास कार्यालय में पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने जिलेवार निजी चिकित्सा संस्थानों के जीव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के अंतर्गत लिए जाने वाले लाइसेंस की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अब तक शेष निजी चिकित्सा संस्थानों में लंबित लाइसेंस को एक माह के भीतर हर हालत में सुनिश्चित कराने के निर्देश सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को दिए।

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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने इसको लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पर्यावरण मंडल के अफसरों को ऐसे अस्पतालों का लाइसेंस महीनेभर के भीतर सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

मेडिकल वेस्ट से कैंसर समेत गंभीर बीमारियां

मेडिकल वेस्ट को खुले में जलाने या फेंकने से कैंसर समेत गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। कैंसर के अलावा निमोनिया, स्वाइन फ्लू, हैजा, डेंगू, मेनेंजाइटिस, हेपेटाइटिस-बी, कोरोना जैसी बीमारियां हो सकती है। वहीं बायो मेडिकल वेस्ट मटेरियल जैसे खून, मल-मूत्र व घातक केमिकल से भीगे कॉटन, पट्टी से लेकर सीरिंज, एक्सपायरी दवाओं को खुले मैदानों व सड़कों के किनारे फेंकने व जलाने से जहरीली गैस निकलती है। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है।

बायो मेडिकल वेस्ट के नियम

  • पीला बैग – रोगी का कचरा, संक्रमित कचरा, प्रयोगशालाओं का कचरा, सनी हुई ड्रेसिंग।
  • लाल बैग – संक्रमित प्लास्टिक कचरा, कैथेटर, कैनुला, सीरिंज, ट्यूब, आरबी बोतल।
  • नीला बैग – ग्लास का टूटा सामान, ट्रेट इंजेक्शन, एक्यूल स्लाइड, कांच की सीरिंज, निडिल, ब्लेड, धातु के धारदार एवं नुकीला सामान।
  • काला बैग – यूरिन, बलगम, मवाद, संक्रमित द्रव्य, संक्रमित कपड़े, ओटी के कपड़े, लेबर रुम के कपड़े।
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इनमें से जिनके पास बी स्तरीय सुविधा है, उन्हें हर वर्ष प्राधिकार लेना होगा। इसके अलावा जहां बी स्तरीय सुविधा नहीं है, उन्हें जीवनभर के लिए जीव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम के तहत केवल एक बार ही प्राधिकार लेना होगा। इन चिकित्सा संस्थानों से निकलने वाले अपशिष्ट या अवशेष का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए इन्हें प्राधिकार के दायरे में लाया गया है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।