59 साल बाद महाशिवरात्रि पर विशेष योग, इसलिए भी है यह पर्व खास

टीआरपी डेस्क। महाशिवरात्रि पर इस बार 59 साल बाद शश योग रहेगा। यह योग साधना की सिद्धि के लिए विशेष महत्व रखता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार साधना की सिद्धि के लिए तीन सिद्ध रात्रियां विशेष मनी गई है। इनमें शरद पूर्णिमा को मोहरात्रि, दीपावली की कालरात्रि तथा महाशिवरात्रि को सिद्ध रात्रि कहा गया है। इस बार महाशिवरात्रि पर चंद्र शनि की मकर में युति के साथ पंच महापुरुषों में शश योग बन रहा है।

आमतौर पर श्रवण नक्षत्र में आने वाली शिवरात्रि तथा मकर राशि के चंद्रमा का योग बनता ही है। लेकिन 59 साल बाद शनि के मकर राशि में होने से तथा चंद्र का संचार अनुक्रम में शनि के वर्गोत्तम अवस्था में शश योग का संयोग बन रहा है। चूंकी चंद्रमा मन तथा शनि ऊर्जा का कारक ग्रह है। चंद्रमा को कला तथा शनि को काल पुरुष का पद प्राप्त है। ऐसी स्थिति में कला तथा काल पुरुष के युति संबंध वाली यह रात्रि सिद्ध रात्रि की श्रेणी में आती है।

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महाशिवरात्रि इसलिए भी खास

इस दिन पांच ग्रहों की राशि पुनरावृत्ति होगी। शनि व चंद्र मकर राशि, गुरु धनु राशि, बुध कुंभ राशि तथा शुक्र मीन राशि में रहेंगे। इससे पहले ग्रहों की यह स्थिति 1961 में बनी थी।

महाशिवरात्रि पर सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग भी है। इस योग में शिव पार्वती का पूजन श्रेष्ठ माना गया है। फाल्गुन मास का आरंभ व समापन सोमवार के दिन होगा। माह में पांच सोमवार आएंगे। फाल्गुन मास में वार का यह अनुक्रम कम ही दिखाई देता है। इसके प्रभाव से देश में सुख शांति का वातावरण निर्मित होगा। साथ ही व्यापार व्यवसाय में वृद्धि होगी।

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