Balcony Gardening: सर्दियों में सरसों का साग खाने का मन है, तो इसके लिए आपके पास खेत होना जरूरी नहीं है। आप अपनी बालकनी में बड़े गमलों की मदद से भी सरसों उगा सकते हैं। इसके लिए सही समय पर बुआई करने, मिट्टी तैयार करने, बीज की गहराई और पौधों के बीच दूरी का ध्यान रखना जरूरी है।
साथ ही, पौधों को पर्याप्त धूप, पानी और संतुलित पोषण देना भी अहम है। इन बातों का ध्यान रखकर आप घर पर सरसों की पत्तियां उगाने की कोशिश कर सकते हैं।
कब करें सरसों की बुआई?
सरसों रबी की फसल है, जिसे आमतौर पर सर्दियों के मौसम के लिए उगाया जाता है। इसकी बुआई का सामान्य समय सितंबर के अंत से नवंबर तक माना जाता है। हालांकि, सरसों की किस्म, मिट्टी, तापमान और क्षेत्र के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है। बालकनी में सरसों उगाने की योजना बना रहे हैं, तो अपने क्षेत्र के कृषि विभाग की सलाह के अनुसार बुआई का समय तय करें। सही समय पर बीज बोने से अंकुरण और पौधों की शुरुआती बढ़त बेहतर हो सकती है।
सरसों उगाने से पहले ऐसे तैयार करें मिट्टी
सरसों की अच्छी बढ़त के लिए मिट्टी की तैयारी जरूरी है। खेत में बुआई से पहले दो से तीन बार जुताई की जाती है। इसके बाद पाटा चलाकर मिट्टी को समतल किया जाता है, जिससे पानी समान रूप से फैल सके और नमी बनी रहे। बालकनी में सरसों उगाने के लिए बड़े गमले चुनें, ताकि पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। गमलों में मिट्टी भरने से पहले उसकी गुणवत्ता और पानी की निकासी का ध्यान रखें। मिट्टी में पानी जमा रहने से पौधों की जड़ों को नुकसान हो सकता है।
कितने बीज डालें और कितनी गहराई रखें?
खेत में सरसों की बुआई के लिए प्रति एकड़ लगभग 1.5 से 2 किलो बीज की मात्रा बताई गई है। हालांकि, यह मात्रा किस्म और बुआई के तरीके के अनुसार बदल सकती है। गमलों में खेती करते समय खेत के लिए बताई गई बीज मात्रा को सीधे लागू न करें। गमले के आकार और पौधों को मिलने वाली जगह के अनुसार बीज डालें। सरसों के बीज छोटे होते हैं, इसलिए उन्हें बहुत गहराई में बोने से बचना चाहिए। सामान्य तौर पर 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर बीज बोए जाते हैं। इससे बीजों को अंकुरण के लिए जरूरी नमी मिल सकती है।
पौधों के बीच रखें सही दूरी
खेत में सरसों की बुआई करते समय एक लाइन से दूसरी लाइन के बीच लगभग 30 सेंटीमीटर और एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच करीब 10 सेंटीमीटर की दूरी रखने की सलाह दी जाती है। इस दूरी से पौधों को हवा और धूप मिलने में मदद मिलती है। बालकनी के गमलों में भी पौधों को जरूरत से ज्यादा घना न रखें। पर्याप्त जगह मिलने से उनकी बढ़त और देखभाल आसान हो सकती है।
बीज उपचार और खाद का रखें ध्यान
सरसों की बुआई से पहले प्रमाणित और स्वस्थ बीज चुनें। बीजों को रोगों से बचाने के लिए उपचार की जरूरत हो सकती है। इसके लिए अपने क्षेत्र और सरसों की किस्म के अनुसार कृषि विभाग की ओर से बताई गई विधि अपनाएं। पौधों की अच्छी बढ़त के लिए संतुलित पोषण भी जरूरी है। खेत में बुआई से पहले मिट्टी की जांच कराने और उसकी रिपोर्ट के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर या अन्य जरूरी पोषक तत्व देने की सलाह दी जाती है। सरसों की फसल में सल्फर पौधों की बढ़त और तेल के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। गमलों में सरसों उगाते समय खाद का इस्तेमाल भी मिट्टी और पौधों की जरूरत के अनुसार करें। जरूरत से ज्यादा उर्वरक डालने से बचें।
सरसों के पौधों को कब और कितना पानी दें?
सरसों के पौधों की बढ़त के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है। हालांकि, ज्यादा पानी जमा होने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए गमलों में पानी निकलने की उचित व्यवस्था रखें। सिंचाई की जरूरत मिट्टी, मौसम और पौधों की स्थिति पर निर्भर करती है। पानी देने से पहले मिट्टी की नमी देख लें और गमले में पानी जमा न होने दें।
सरसों उगाते समय इन गलतियों से बचें
- बालकनी में सरसों उगाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें।
- बीजों को जरूरत से ज्यादा गहराई में न बोएं।
- गमले के आकार के मुकाबले बहुत ज्यादा बीज न डालें।
- पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह दें।
- जरूरत से ज्यादा खाद या उर्वरक का इस्तेमाल न करें।
- गमलों में पानी जमा न होने दें।
इन बातों का ध्यान रखने से सरसों के पौधों की देखभाल आसान हो सकती है। सही समय पर बुआई और नियमित निगरानी से आप अपनी बालकनी में सरसों उगाने की शुरुआत कर सकते हैं।



