Arnab Storm Effect: अर्नब तूफान की मार किसानों पर दोहरी पड़ी है। तूफान से जनजीवन व्यस्त होने के साथ ही किसानों की फसल भी बर्बाद हो गई है। धमतरी में पिछले 36 घंटों से तेज हवाओं के साथ बारिश जारी है। जिसने किसानों की सालभर की मेहनत धान की फसल पर पानी फेर दिया है। कई जिलों में अब तक धान की 10 प्रतिशत कटाई भी नहीं हो पाई है। ऐसे में खेत में पड़े-पड़े ही किसानों की फसल खराब हो गई है।
किसानों ने शासन-प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वे कराने और फसल नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। धमतरी जिले में किसानों की मांग है कि 30 हजार रुपये प्रति एकड़ क्षतिपूर्ति उन्हें दी जाए। हालांकि अभी तक किसानों को हुए फसल के नुकसान को लेकर सर्वे अभी शुरू नहीं हुआ है। प्रशासनिक अमला बारिश थमने और तूफान का असर कम होने के बाद इसके लिए निकलेगा। वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। इस पूरी प्रक्रिया में समय तो लगेगा ही, लेकिन अभी सीधे तौर पर किसानों की मुश्किलों बढ़ गई हैं।
खेतों में भीगा धान, किसानों की बढ़ी चिंता
धमतरी जिले के गागरा, कंडेल, नवागांव और भानपुरी ,बेलरगाव , सांकरा, दुगली , गट्टसिल्ली,कुकरेल,नारी, जीजमगांव सिर्री,भखारा ,सहित आसपास के गांवों में असमय बारिश और तेज हवाओं से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के समय मौसम की मार ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी फसल और कटाई के बाद खुले में रखे धान को बचाना चुनौती बन गया है।
कांकेर में 10 प्रतिशत धान कटाई नहीं
कांकेर में अब तक महज 10 फ़ीसदी धान की कटाई ही पूरी हो सकी है। हार्वेस्टर और मजदूरों से चल रहा कटाई मिजाई का काम बारिश के चलते पूरी तरह ठप हो गया है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की बालियां भीग रही हैं। खलिहानों में रखी उपज में नमी के कारण फफूंद और अंकुरण का जोखिम बढ़ गया है। बे मौसम बारिश से आगामी रवि सीजन की मक्का बुवाई भी पीछे गई है, खेतों में अत्यधिक नमी और बादलों के बने रहने से धान में कटवा किट का प्रकोप तेजी से फैलने की आशंका है।
पिछला मुआवजा मिला नहीं, अब नई मुसीबत
धमतरी के किसानों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। बीते दिनों लगातार पांच दिन तक हुई बारिश के बाद गंगरेल बांध के 14 गेट खोले गए थे। इससे महानदी सहित नहरों में बड़े पैमाने पर पानी छोड़ा गया और क्षेत्र के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। उस दौरान करीब 9 हजार एकड़ फसल प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी। किसानों का कहना है कि पिछली बाढ़ से हुए नुकसान के बाद अब तक उन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाया है। ऐसे में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से हुई बारिश ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं।
नुकसान के आकलन के करवाएंगे सर्वे
धमतरी जिले के कृषि उपसंचालक मोनेस साहू का कहना है जिले में धान के साथ-साथ अन्य फलदार शब्जियों फल को अर्नब का असर देखने को मिला है जिले में RI के माध्यम से फसल नुकसान का आंकड़ा का आकलन किया जायेगा और शासन के निर्देशानुसार फसल बर्बाद से किसानों को राहत दिया जायेगा अभी आंकड़ा आना बाकी है। अब किसानों की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि पहले बाढ़ और अब असमय बारिश से परेशान किसानों को राहत कब मिलेगी? फिलहाल, धमतरी के खेतों में भीगा धान और जमीन पर बिछी फसल किसानों की चिंता बयां कर रही है।



