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CG News: धान की हर बोरियों पर लगेगा QR कोड! परिवहन और स्टॉक की होगी डिजिटल निगरानी, राइस मिलर्स के लिए भी बदले नियम

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में सरकारी धान की कस्टम मिलिंग करने वाले राइस मिल संचालकों के लिए राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की नई नीति जारी की है। इसके तहत चावल जमा करने की समयसीमा, धान आवंटन, परिवहन और स्टॉक की निगरानी को लेकर कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब चावल की बोरियों […]

Rice Millers New Rules
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में सरकारी धान की कस्टम मिलिंग करने वाले राइस मिल संचालकों के लिए राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की नई नीति जारी की है। इसके तहत चावल जमा करने की समयसीमा, धान आवंटन, परिवहन और स्टॉक की निगरानी को लेकर कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब चावल की बोरियों पर क्यूआर कोड लगाया जाएगा और डिजिटल माध्यम से उनकी आवाजाही पर नजर रखी जाएगी। निर्धारित समयसीमा में चावल जमा नहीं करने वाले मिलरों पर जुर्माना लगाने के साथ संबंधित स्टेक का आवंटन रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की नई नीति के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और अन्य निर्धारित योजनाओं के तहत सरकारी चावल की बोरियों पर क्यूआर कोड लगाने की व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक बोरी को कॉस्ट शीट नंबर से जोड़ा जाएगा, जिससे राइस मिल से लेकर भारतीय खाद्य निगम (FCI), नागरिक आपूर्ति निगम और उचित मूल्य की दुकानों तक चावल की आवाजाही का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा। इससे सरकारी चावल के स्टॉक में गड़बड़ी, बोरियों की अदला-बदली और हेराफेरी रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

25 कार्य दिवस में चावल जमा करना अनिवार्य

नई कस्टम मिलिंग नीति के तहत भारतीय खाद्य निगम या नागरिक आपूर्ति निगम से स्टेक आवंटित होने के बाद राइस मिल संचालकों को 25 कार्य दिवस के भीतर निर्धारित मात्रा में चावल जमा करना होगा। तय समयसीमा में चावल जमा नहीं करने पर बकाया मात्रा पर 10 रुपये प्रति क्विंटल की दर से जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा संबंधित स्टेक का आवंटन निरस्त भी किया जा सकता है। पिछले अनुबंध के तहत मिलिंग पूरी करने और पूरा चावल जमा करने के बाद ही मिलरों को नए अनुबंध की अनुमति दी जाएगी।

अरवा और उसना चावल के लिए अलग-अलग अनुपात

सरकारी धान की कस्टम मिलिंग के बाद चावल जमा करने की मात्रा भी निर्धारित की गई है। नीति के अनुसार, अरवा चावल मिलिंग में धान की मात्रा के मुकाबले 67 प्रतिशत और उसना चावल मिलिंग में 68 प्रतिशत चावल जमा करना होगा। मिलरों को निर्धारित अनुपात के अनुसार चावल उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, ताकि सरकारी योजनाओं के लिए चावल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और धान से तैयार चावल का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखा जा सके।

31 मार्च 2027 तक करना होगा धान का उठाव

सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में उपार्जित समस्त सरकारी धान का उठाव 31 मार्च 2027 तक पूरा करना अनिवार्य किया है। वहीं, इस धान की कस्टम मिलिंग के बाद तैयार चावल जमा करने की अवधि 15 नवंबर 2026 से 31 जुलाई 2027 तक निर्धारित की गई है। इन समयसीमाओं का उद्देश्य खरीदी केंद्रों में लंबे समय तक धान जमा रहने की स्थिति को कम करना और मिलिंग की प्रक्रिया को तय कार्यक्रम के अनुसार पूरा कराना है।

वार्षिक क्षमता के 75 प्रतिशत तक ही मिलेगा धान

नई नीति के तहत राइस मिलों को उनकी वार्षिक मिलिंग क्षमता के अधिकतम 75 प्रतिशत तक ही सरकारी धान आवंटित किया जाएगा। शुरुआत में मिल की पंजीकृत क्षमता के आधार पर चार महीने की मिलिंग क्षमता के बराबर धान आवंटित करने की अनुमति होगी। इसके बाद एक बार में अधिकतम छह महीने की मिलिंग क्षमता के बराबर धान दिया जा सकेगा। कस्टम मिलिंग के लिए मिल का पंजीयन अनिवार्य होगा और भौतिक सत्यापन के बाद ही स्टेट फूड प्रोक्योरमेंट पोर्टल (SFPP) पर पंजीयन किया जाएगा।

धान और चावल ले जाने वाले वाहनों की होगी निगरानी

सरकारी धान के परिवहन में गड़बड़ी रोकने के लिए धान और चावल ले जाने वाले वाहनों को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के वाहन पोर्टल से जोड़ने और उनमें स्थान ट्रैक करने वाले उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए हैं। मिलरों को खरीदी केंद्रों से उठाया गया धान सीधे अपने मिल परिसर तक पहुंचाना होगा। परिवहन व्यवस्था की डिजिटल निगरानी से धान की आवाजाही का रिकॉर्ड रखने और भंडारण, परिवहन तथा सूखत से जुड़े खर्चों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

निजी और सरकारी धान का रिकॉर्ड अलग रखना होगा

नई नीति के अनुसार, राइस मिल संचालकों को अपनी बिजली खपत का विवरण पोर्टल पर दर्ज करना होगा। इसके साथ ही निजी स्रोत से प्राप्त धान-चावल और सरकारी धान-चावल का हिसाब अलग-अलग रखना अनिवार्य होगा। पोर्टल के माध्यम से यह जानकारी सेंट्रल फूड प्रोक्योरमेंट पोर्टल तक भी पहुंचाई जाएगी। इससे मिलों में उपलब्ध स्टॉक और सरकारी धान से तैयार चावल के रिकॉर्ड का मिलान करने में मदद मिलेगी तथा गड़बड़ी की आशंका कम होगी।

नियम तोड़ने वाले मिलरों को नहीं मिलेगी अनुमति

राज्य सरकार ने कस्टम मिलिंग के लिए पात्रता संबंधी शर्तें भी स्पष्ट कर दी हैं। जिन राइस मिल संचालकों के खिलाफ कस्टम मिलिंग संबंधी सरकारी निर्देशों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है, उन्हें पंजीयन और मिलिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत किसी अपराध में दोषसिद्ध हुए मिलर भी कस्टम मिलिंग के लिए पात्र नहीं होंगे। नई नीति में समयसीमा का पालन, डिजिटल निगरानी, क्षमता के अनुसार धान आवंटन और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करके सरकारी धान की कस्टम मिलिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया है।

Naveen Kumar Sahu
लेखक / पत्रकार:

Naveen Kumar Sahu

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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