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धान की फसल पर मंडरा रहा राइस ड्वार्फ रोग का खतरा, ऐसे पहचानें लक्षण, जानिए बचाव के उपाय

Paddy Farming Tips: धान की फसल में इन दिनों राइस ड्वार्फ रोग का खतरा मंडरा रहा है। कई क्षेत्रों में इस बीमारी के लक्षण सामने आए हैं। वायरस से होने वाली इस बीमारी की समय पर पहचान नहीं होने पर फसल की पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार राइस ड्वार्फ […]

Rice Dwarf Paddy Disease
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Paddy Farming Tips: धान की फसल में इन दिनों राइस ड्वार्फ रोग का खतरा मंडरा रहा है। कई क्षेत्रों में इस बीमारी के लक्षण सामने आए हैं। वायरस से होने वाली इस बीमारी की समय पर पहचान नहीं होने पर फसल की पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार राइस ड्वार्फ एक वायरस जनित बीमारी है। संक्रमित पौधे सामान्य पौधों की तुलना में छोटे रह जाते हैं।

उनकी पत्तियां पतली और नुकीली दिखाई दे सकती हैं, जबकि जड़ों का विकास भी प्रभावित होता है। गंभीर स्थिति में पौधों में बालियां ठीक से विकसित नहीं होतीं और दाने बनने में परेशानी आती है। ज्यादा संक्रमण होने पर पौधे सूख भी सकते हैं।

व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर से फैलता है रोग

विशेषज्ञों के मुताबिक राइस ड्वार्फ वायरस के फैलाव में व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर यानी सफेद पीठ वाला फुदका अहम भूमिका निभाता है। इस कीट के छोटे बच्चे हल्के भूरे-सफेद रंग के दिखाई दे सकते हैं। वयस्क कीट की पीठ पर सफेद पट्टी और अगले पंखों के पिछले हिस्से में काले निशान इसकी पहचान में मदद करते हैं।

खेत में ऐसे करें कीट की पहचान

किसानों को धान के खेत की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। पौधों को हल्के से झुकाकर दो-तीन बार हिलाने पर यदि खेत के पानी की सतह पर छोटे कीट या उनके बच्चे दिखाई दें तो खेत में व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर की मौजूदगी हो सकती है। कीटों की संख्या आर्थिक नुकसान की सीमा तक पहुंचने पर ही विशेषज्ञों की अनुशंसा के अनुसार दवा का इस्तेमाल करना चाहिए।

सप्ताह में कम से कम एक बार करें निगरानी

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से सप्ताह में कम से कम एक बार धान के खेत का निरीक्षण करने की अपील की है। फसल में किसी तरह का असामान्य बदलाव, कीट या बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए। बिना जानकारी या आवश्यकता के कीटनाशकों का छिड़काव करने से फसल और खेत के लिए नुकसान हो सकता है।

संक्रमित पौधों को तुरंत खेत से हटाएं

यदि खेत में राइस ड्वार्फ से संक्रमित पौधे दिखाई दें तो उन्हें शुरुआती अवस्था में ही उखाड़कर खेत से बाहर करना जरूरी है। विशेषज्ञों ने संक्रमित पौधों को गहराई में दबाने की सलाह दी है, ताकि बीमारी के फैलने की संभावना कम हो। खेत की मेड़ और सिंचाई नालियों को भी खरपतवार से मुक्त रखने की सलाह दी गई है।

रात में रोशनी लगाकर कीट पर रखें नजर

विशेषज्ञों के अनुसार व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं। ऐसे में खेत के आसपास रात के समय रोशनी की व्यवस्था कर किसान कीटों की मौजूदगी पर नजर रख सकते हैं। जिन खेतों में पिछले साल इस तरह की समस्या सामने आई थी, वहां विशेष रूप से नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है।

नाइट्रोजन की ज्यादा मात्रा से बचें

किसानों को नाइट्रोजन उर्वरक का इस्तेमाल अनुशंसित मात्रा में ही करने की सलाह दी गई है। जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने पर पौधों में कीटों के प्रकोप की स्थिति बढ़ सकती है। इसलिए उर्वरक का इस्तेमाल फसल की जरूरत और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना बेहतर है।

बिना सलाह के कीटनाशक का छिड़काव न करें

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खास तौर पर चेतावनी दी है कि बीमारी या कीट दिखाई देने मात्र से तुरंत कीटनाशक का छिड़काव न करें। पहले कीट की संख्या और फसल की स्थिति की जांच कराई जानी चाहिए। आर्थिक नुकसान की सीमा पार होने पर ही विश्वविद्यालय या कृषि विभाग की अनुशंसित दवा और निर्धारित मात्रा का इस्तेमाल करना चाहिए।

समय पर पहचान से बच सकती है फसल

राइस ड्वार्फ बीमारी के खिलाफ फिलहाल सबसे जरूरी उपाय खेत की नियमित निगरानी और शुरुआती स्तर पर नियंत्रण है। संक्रमित पौधों को समय पर हटाने, व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर पर नजर रखने और संतुलित उर्वरक प्रबंधन से नुकसान को कम किया जा सकता है। लक्षण दिखाई देने पर किसानों को नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से वैज्ञानिक सलाह लेने की जरूरत है।

Naveen Kumar Sahu
लेखक / पत्रकार:

Naveen Kumar Sahu

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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