Thursday, January 27, 2022
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तीसरी लहर से पहले 94 करोड़ की आबादी का टीकाकरण जरूरी… हर दिन करीब 73.6 लाख खुराकें लगानी होंगी… बढ़ाना होगा मैन पॉवर तब जाकर हारेगा कोरोना

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टीआरपी डेस्क। देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए कोविड टीकाकरण अभियान तेज करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन वैक्सीन की किल्लत इसमें बाधा बन रही है। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता अगले महीने से बढ़ जाएगी।

केंद्र सरकार का अनुमान है कि अगस्त से दिसंबर के बीच भारत के पास करीब 200 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन की खुराकें उपलब्ध होंगी। जिससे 18 से 45 साल वाले आयु वर्ग के लोगों के लिए भी वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज होगी। साथ ही यह संभावना जताई है कि इस साल के अंत तक 18 प्लस आयु वर्ग के सभी लोगों को टीका लगा दिया जाएगा। तो चलिए जानते हैं कि सरकार ने जो अनुमान लगाया है और अभी जो वैक्सीनेशन की रफ्तार है, उसके हिसाब से दिसंबर तक सभी वयस्क आबादी को टीका लगाने में एक दिन में सरकार को कितने लोगों को वैक्सीन लगानी होगी।

अब तक हर रोज लग रही है 15 लाख डोज

देश में 16 जनवरी को दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू कर कोरोना के खिलाफ जंग की शुरुआत की गई थी। 16 जनवरी से चल रहे टीकाकरण अभियान के आज शनिवार को चार महीने यानी 120 दिन पूर हो रहे हैं। इन 120 दिनों में भारत में अब तक करीब 18 करोड़ वैक्सीन की डोज लगाई गई है। अगर औसत की बात करें, तो एक दिन में भारत ने अब तक 15 लाख वैक्सीन के डोज लगाए हैं।

हालांकि, पिछले चार महीने में टीकाकरण की रफ्तार सुस्त जरूर हुई है, लेकिन फिर भी औसतन 15 लाख डोज के हिसाब से एक दिन में वैक्सीन लगाई गई हैं। अब एक बार फिर वैक्सीन लगाने की रफ्तार में तेजी देखी गई है। पिछले सप्ताह देश में एक दिन में औसतन 17 लाख वैक्सीन के डोज लगाए गए हैं। सरकार का अनुमान है कि जुलाई के अंत तक वैक्सीन की सप्लाई में बढ़ोतरी होगी।

पांच गुना ज्यादा वैक्सीन लगानी होंगी प्रतिदिन

देश में अनुमानित वयस्क आबादी करीब 94 करोड़ है और इस आबादी का टीकाकरण करने के लिए 188 करोड़ वैक्सीन की डोज की जरूरत होगी। वयस्क आबादी को वैक्सीन लगाने के लिए साल के बाकी 231 दिनों में 170 करोड़ डोज की जरूरत होगी। यानी अगर सप्ताह के सातों दिन जोड़ लिए जाए, तो हर दिन करीब 73.6 लाख खुराकें लगानी होंगी। इस तरह से देखें तो अभी जो टीकाकरण की रफ्तार है, उसके औसत के हिसाब से करीब पांच गुना ज्यादा वैक्सीन की डोज रोजाना लगानी होंगी।

टीकाकरण: अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगा भारत

भारत के नाम ही एक दिन में सबसे ज्यादा डोज लगाने का रिकॉर्ड है, जो उसने 5 अप्रैल को बनाया था, तब एक दिन में 41.6 लाख डोज लगाई गई थीं। चुनौती सिर्फ सप्लाई की नहीं है, इसके लिए टीकाकरण केंद्रों की संख्या और मैनपावर भी कई गुना बढ़ाना होगा।

दुनिया प्रति दस लाख आबादी में कितने को टीका

प्रति दस लाख की आबादी में देश में कितने लोगों को टीका लग रहा है ? इस दृष्टिकोण से दुनिया में भारत की क्‍या स्थिति है ? इस लिहाज से इजरायल सबसे ऊपर है। इसके बाद ब्रिटेन और तीसरे स्‍थान पर अमेरिका है। भारत 15वें स्‍थान पर है। उरुग्‍वे चौथे पायदान और तुर्की पाचवें स्‍थान पर है। इस क्रम में स्‍पेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी, कनाडा, ब्राजील, चीन, मैक्सिको, रूस और 15वें स्‍थान पर भारत है। इस लिहाज से चीन और रूस की स्थिति भी भारत से बहुत बेहतर नहीं हे। चीन 12वें और रूस 14वें स्‍थान पर है। यानी भारत से सिर्फ एक पायदान ऊपर है। यूरोपीय देशों की स्थिति काफी अच्‍छी है। भारत में केवल 4.8 फीसद आबादी को वैक्‍सीन का पहला डोज लगा है। 0.7 फीसद आबादी को दूसरा डोज लगा है। भारत अपने लक्ष्‍य से काफी पीछे चल रहा है। यही वजह है कि भारत में वैक्‍सीन का असर आबादी पर नहीं दिख रहा है। इस हिसाब से देश में कम से कम 50 लाख डोज के लक्ष्‍य के साथ काम करना होगा।

कुल वैक्सीनेशन में तीसरे स्थान पर भारत

अगर दुनियाभर में सबसे ज्‍यादा वैक्‍सीनेशन की बात करें तो भारत दुनिया की सूची में तीसरे पायदान पर है। यह तस्‍वीर राहत देने वाली हो सकती है, लेकिन कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए यह काफी नहीं है। वैक्‍सीनेशन के मामले में अमेरिका टॉप पर है। चीन दूसरे स्‍थान पर है, जबकि दस लाख की आबादी के लिहाज से टीकाकरण के मामले में वह 12वें स्‍थान पर है। वैक्‍सीनेशन में चीन की बड़ी आबादी आड़े आ रही है। चीन के बाद भारत तीसरे स्‍थान पर है। ब्रिटेन, ब्राजील, जर्मनी, फ्रांस, स्‍पेल इजरायल, भारत से पीछे चल रहे हैं।

भारत को मिली कोव‍िड-19 वैक्सीन ‘स्पुतनिक V’ (Sputnik V)

रूस की कोव‍िड-19 वैक्सीन ‘स्पुतनिक V’ (Sputnik V) को एक्सपर्ट कमिटी ने आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कोरोना महामारी से निपटने के लिए देश को तीसरी वैक्सीन मिल गई है। गौरतलब है कि देश में महामारी के खिलाफ कोविशील्ड और कोवैक्सीन का इस्तेमाल पहले से ही हो रहा है। अब रूस की स्पुतनिक V को मंजूरी मिलने के बाद इस महामारी से निपटने के लिए डॉक्टरों के पास एक और बड़ा हथियार आ गया है। बता दें कि सबसे पहले रूस ने ही कोविड-19 वैक्सीन बनाने का दावा किया था।

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