Promise of economical, turned into extravagance -पाठ्य पुस्तक निगम में 44 करोड़ का खेल
Promise of economical, turned into extravagance -पाठ्य पुस्तक निगम में 44 करोड़ का खेल

विशेष संवादाता, रायपुर

शासन के पैसों को किफ़ायत से खर्च करने का वादा करने वाले जिम्मेदार छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम में बैठते ही फ़िज़ूलख़र्ची करने में लगे हैं। स्कूली बच्चों की किताबों का मुद्रण का दारोमदार लेने वालों ने कागज़ खरीदी में एक बार फिर खेल किया है। पिछली दफे भी 70 GSM का कागज़ मनमाफिक दरों पर लेने के बाद फिर इस साल उसी खेल को दोहराने वाला है।

छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम में शिक्षा सत्र 2023 – 24 में निःशुल्क पुस्तक मुद्रण और वितरण के लिए पेपर खरीदी कटघरे में है। पूर्व शिक्षा सत्र में भी निगम द्वारा 48 रुपए के कागज़ की खरीदी 73 रुपए प्रति किलो की दर पर किया गया था।

इस सत्र के लिए 90 रुपए मूल्य का कागज़ 113 रुपए में 70 GSM का कागज़ लिया जा रहा। बता दें कि प्रतिवर्ष औसतन पुस्तकों के मुद्रण हेतु तक़रीबन 10 हज़ार मिट्रिक तन पेपर की खरीदी निगम करता है। ऐसे में कागज़ों की कीमत का तुलनात्मक अध्ययन करें तो साफ हो जाता है कि पूर्ववर्ती खरीदी दर में इस बार 55 फीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है।

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इसे फ़िज़ूलख़र्ची नहीं सोच समझकर की जा रही निज लाभ की योजना कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा। देखा जाये तो 55 फीसदी वृद्धि दर से निगम को 44 करोड़ रुपये का चुना लगेगा। बता दें कि पाठ्य पुस्तक निगम का सेटअप करीबन 100 करोड़ का बताया जाता है। ऐसे में जो पेपर मिल से कागज़ की खरीदी की जा रही है उससे निगम को 44 करोड़ का चुना लगेगा। क्योंकि 113 रू की जिस दर और क्वालिटी का कागज़ है उसकी बाजार दर 90 रुपये से ज्यादा की नहीं।

सुलगता सवाल

  1. कागज़ की उत्कृष्टता, ज्यादा सफेदी के नाम पर मनमाफिक दरें कौन तय कर रहा ?
  2. क्यों 90 रुपए प्रति किलो का कागज़ 113 की दर पर खरीदने की तैयारी में है निगम?
  3. 100 करोड़ के पाठ्य पुस्तक निगम को अब तक जिम्मेदारों ने कितना लाभ पहुंचाया?
  4. पेपर खरीद, मुद्रण और वितरण के लिए परिवहन तक में चेहतों को मुंहमांगी दर पर काम ?
  5. पहली बार एल – 1 कौन था और किसने बिलो के बदले एल – 1 केंसिल कर एबो को काम दिया ?
  6. जिस कंपनी से निगम 113 में कागज खरीदने वाला है क्यों उसने 90 रुपए में अन्य को दिया?
  7. करोड़ों की खरीदी के लिए क्या निगम के जिम्मेदारों ने बाजार भाव लिया, क्या यह जरुरी नहीं ?
  8. पूर्व में 48 रू का कागज़ 73 में लिया गया था इसे लेकर भी FIR के लिए कोर्ट की शरण में ?
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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।