mahanadi BHAVAN
state government has granted Cabinet and State Minister status

रायपुर। सरकारी दफ्तरों में “एक ही कुर्सी, एक ही फाइल” का दौर अब खत्म होने वाला है। राज्य शासन ने अपने प्रत्येक अधिकारी कर्मचारी के डेस्क असाइनमेंट कार्य पटल को हर 3 वर्ष में बदलने के निर्देश दिए हैं। सचिव जीएडी अविनाश चंपावत ने सभी विभागाध्यक्ष, कमिश्नर, कलेक्टर और विभाग प्रमुखों को यह पत्र जारी किया है। उनका कहना है कि अधिकांश अधिकारी कर्मचारी लंबे समय से एक ही स्थान या एक ही  टेबल पर कार्य कर रहे हैं। उन्हें सभी तरह के कार्य का अनुभव दिलाने उनके डेस्क असाइनमेंट बदलना आवश्यक होता है। इसलिए यह परिपत्र के बिंदुओं को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।

आखिर क्यों लिया गया ये फैसला? 

GAD के पत्र में साफ कहा गया है कि राज्य के विभागाध्यक्ष कार्यालयों, संभागीय आयुक्त कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालयों और अधीनस्थ कार्यालयों में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी लंबे समय से एक ही स्थान या एक ही कार्य-पटल पर कार्यरत हैं।

शासन ने इसे रोकने के पीछे ये तर्क दिए हैं:

1.  कार्य क्षमता में वृद्धि: एक ही काम बार-बार करने से कर्मचारी की सोच सीमित हो जाती है। सभी तरह के काम का अनुभव देने से समग्र विकास होगा।

2.  व्यावहारिक अनुभव: कर्मचारियों को कार्यालय में होने वाले सभी प्रकार के कार्यों, प्रक्रियाओं और नियमों की जानकारी मिलेगी।

3.  दक्षता और कार्यकुशलता: अलग-अलग डेस्क पर काम करने से कर्मचारी कार्यालयीन व्यवस्थाओं से भली-भांति परिचित होंगे और उनकी दक्षता बढ़ेगी।

4.  पारदर्शिता और जवाबदेही: लंबे समय तक एक ही जगह रहने से फाइलों में सांठगांठ और भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ती है। रोटेशन से सुशासन सुनिश्चित होगा।

पत्र में कहा गया – “अतः कर्मचारियों को समय-समय पर विभिन्न कार्यों में सहभागिता एवं प्रशिक्षण का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए।”

आदेश में क्या है? 4 बिंदुओं में समझें

राज्य शासन ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए ये 4 बिंदु तय किए हैं:

बिंदु 1: 3 साल में अनिवार्य रीशफलिंग

राज्य के समस्त विभागों में पदस्थ सभी अधिकारी और कर्मचारियों के कार्य-पटल का हर 3 वर्ष में अनिवार्य परिवर्तन किया जाए। यानी कोई भी 3 साल से ज्यादा एक ही डेस्क पर नहीं बैठेगा।

बिंदु 2: कार्यालयीन हित सर्वोपरि

डेस्क बदलते समय संबंधित अधिकारी/कर्मचारी की प्रशासनिक आवश्यकता, कार्य की प्रकृति और कार्यालयीन हित का समुचित ध्यान रखा जाए। मतलब अंधाधुंध तबादला नहीं होगा।

बिंदु 3: अपवाद के लिए सख्त शर्त

विशेष परिस्थिति में यदि किसी को उसी कार्य-पटल पर बनाए रखना जरूरी हो, तो सक्षम प्राधिकारी का लिखित और कारण सहित अनुमोदन लेना होगा। मौखिक आदेश नहीं चलेगा।

बिंदु 4: विभागाध्यक्षों की जवाबदेही

सभी विभागाध्यक्ष और कार्यालय प्रमुख यह सुनिश्चित करेंगे कि इस परिपत्र का समयबद्ध और प्रभावी अनुपालन हो। लापरवाही पर जवाबदेही तय होगी।

मंत्रालय से लेकर फील्ड तक मचेगी खलबली

यह आदेश कागज पर नहीं, जमीन पर लागू हुआ तो सबसे बड़ा असर मंत्रालय में दिखेगा। विडंबना ये है कि आदेश जारी करने वाले GAD में ही कई अधिकारी-कर्मचारी 6 से 8 साल से एक ही जगह जमे हुए हैं। 

इसके अलावा जिन विभागों में इसका असर सबसे ज्यादा होगा:

1.  लोक निर्माण विभाग – लोनिवि

2.  लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी – PHE 

3.  जल संसाधन विभाग

4.  वाणिज्यिक कर – GST

5.  स्कूल शिक्षा विभाग

6.  स्वास्थ्य विभाग

इन विभागों में निराकरण, लेखा, स्थापना, टेंडर जैसे संवेदनशील पटलों पर लोग सालों से जमे हैं।

अब सभी विभागों को 3 महीने के अंदर रीशफलिंग प्लान बनाकर GAD को भेजना होगा। जिनके 3 साल पूरे हो चुके हैं, उनकी लिस्ट पहले चरण में बदली जाएगी।

उधर कर्मचारी संगठनों ने इस आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है इससे “नए लोगों को मौका” मिलेगा और “एकाधिकार” खत्म होगा। बहरहाल अब देखना है कि विभागाध्यक्ष इस आदेश को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।

FAQ: GAD का 3 साल डेस्क रोटेशन आदेश

सवाल 1. आदेश किसने जारी किया ?

GAD सचिव अविनाश चंपावत ने सभी विभागाध्यक्ष, कमिश्नर, कलेक्टर को पत्र लिखा

सवाल 2. मुख्य प्रावधान क्या है ?

हर 3 साल में अधिकारी-कर्मचारी का डेस्क बदलना अनिवार्य

सवाल 3.;इसका उद्देश्य क्या है ?

पारदर्शिता, जवाबदेही, कार्यकुशलता और कर्मचारियों को बहुआयामी अनुभव देना

सवाल 4. क्या कोई छूट है ? 

हां, सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति से विशेष परिस्थिति में 3 साल से ज्यादा रखा जा सकता है

सवाल 5. सबसे ज्यादा असर कहां होगा ?

मंत्रालय, लोनिवि, PHE, GST, स्वास्थ्य और शिक्षा विभागों में