Diwali 2026: दिवाली से पहले पटाखों की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। छत्तीसगढ़ में इस बार पटाखे खरीदने के लिए लोगों को पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। बाजार में पटाखों के दाम 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसके बावजूद कारोबारियों को उम्मीद है कि त्योहार नजदीक आने के साथ खरीदारी बढ़ेगी और प्रदेश में करीब 500 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है।
पटाखा कारोबारियों के मुताबिक, इस साल स्काई शॉट, लड़ी, बम और दूसरे लोकप्रिय पटाखों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। पांच हजार रुपये में मिलने वाली लड़ी अब करीब छह हजार रुपये की हो गई है। वहीं, दो हजार रुपये वाली लड़ी के लिए ग्राहकों को लगभग 2,300 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। हालांकि, कीमतें कंपनी और उत्पाद के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
नए पटाखों ने बढ़ाई बाजार की रौनक
इस बार बाजार में दिवाली से पहले पारंपरिक पटाखों के साथ कई नए विकल्प भी उपलब्ध हैं। अलग-अलग तरह के स्काई शॉट और कई रंगों वाले पटाखे ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं।
गांवों से शहरों तक फैला कारोबार
छत्तीसगढ़ में पटाखों की बिक्री केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। गांवों और कस्बों में भी त्योहार के दौरान पटाखों की मांग बढ़ जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी दुकानों से लेकर शहरों में लाइसेंसधारी विक्रेताओं तक बिक्री का नेटवर्क फैला हुआ है। राजधानी रायपुर इस कारोबार का प्रमुख केंद्र है, जहां दिवाली के दौरान बड़ी मात्रा में खरीदारी होने की उम्मीद रहती है।
क्यों हुए महंगे ?
भारत में पटाखा उत्पादन का प्रमुख केंद्र तमिलनाडु का शिवकाशी है, जहां से देश के कई हिस्सों में पटाखों की आपूर्ति की जाती है। कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत पर असर पड़ा है। सल्फर की कीमत एक समय 75 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 140 रुपये तक पहुंच गई थी, हालांकि बाद में इसमें गिरावट आई और कीमत करीब 100 रुपये प्रति किलो रह गई। इसके अलावा एल्युमिनियम, सोडियम नाइट्रेट और अन्य जरूरी सामग्री भी महंगी हुई हैं।
आपूर्ति में देरी से भी बढ़ सकता है खर्च
पटाखा निर्माताओं को महंगे कच्चे माल के साथ आपूर्ति में देरी की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में जहाजों से माल पहुंचने में आ रही बाधाओं के कारण सल्फर और चिपकाने वाले पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। सामान देर से पहुंचने पर उत्पादन की प्रक्रिया और लागत दोनों पर असर पड़ता है। कारोबारियों का अनुमान है कि इन परिस्थितियों के कारण पटाखे बनाने की लागत में करीब 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है।



