A symbolic view of gold jewelry and gleaming coins.
New prices for gold and silver are determined amidst the daily fluctuations in the bullion market.

टीआरपी डेस्क। मिडिल ईस्ट में जारी इजरायल-ईरान तनाव के बावजूद सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट ने पूरी दुनिया के बाजारों को हिला दिया है। भारतीय बाजार (MCX) में पिछले पांच कारोबारी दिनों में चांदी की कीमतों में ₹32,000 प्रति किलो और सोने में ₹13,000 प्रति 10 ग्राम तक का बड़ा ‘क्रैश’ देखा गया है।

MCX और घरेलू मार्केट में ताजा भाव

बीते एक हफ्ते की गिरावट के बाद कीमतें अब इन स्तरों पर आ गई हैं। 15 मार्च को जो सोना ₹1,59,660 के करीब था, वह अब ₹1,45,970 प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया है। चांदी की कीमतों में सबसे तगड़ी मार पड़ी है। ₹2.75 लाख के स्तर से टूटकर चांदी अब ₹2.43 लाख से ₹2.45 लाख प्रति किलो के बीच कारोबार कर रही है। रायपुर और दिल्ली जैसे शहरों में आज 22 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹1,33,800 प्रति 10 ग्राम चल रहा है।

कीमतें टूटने के 4 सबसे बड़े कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के बावजूद कीमतों के गिरने के पीछे ये प्रमुख ग्लोबल संकेत है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ‘हॉकिश’ रुख: यूएस फेड ने अपनी हालिया मीटिंग में ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% पर स्थिर रखा और भविष्य में केवल एक रेट कट का संकेत दिया। इससे निवेशकों ने सोने जैसे बिना ब्याज वाले एसेट से पैसा निकालकर बॉन्ड्स में लगाना शुरू कर दिया। वैश्विक अनिश्चितता के दौर में डॉलर ‘अल्टीमेट सेफ हेवन’ बनकर उभरा है। डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है, जिससे मांग में कमी आती है और कीमतें गिरती हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें $119 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। ऐसे में बड़े संस्थागत निवेशकों ने अन्य बाजारों (जैसे स्टॉक्स) में हुए घाटे की भरपाई और मार्जिन कॉल्स को पूरा करने के लिए सोने की भारी बिकवाली की है। सोना पिछले एक साल में ₹2,600 (डॉलर में) से ₹5,000 के पार निकल गया था। इस ऊंचे स्तर पर बड़े ट्रेडर्स ने जमकर मुनाफावसूली की है, जिससे कीमतों में ‘पेपर मार्केट फ्लशिंग’ हुई है।

आगे क्या होगा?

मानना है कि शादियों के सीजन में यह गिरावट भारतीय खरीदारों के लिए एक सुनहरा मौका है। हालांकि, तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती और डॉलर की मजबूती कम नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।