महीने की शुरुआत में बैंक खाते में सैलरी क्रेडिट होते ही तेजी से पैसे खत्म होने की समस्या से जूझ रहे नौकरीपेशा लोगों के लिए 7 वित्तीय उपाय बेहद असरदार साबित हो सकते हैं।
खासतौर पर सीमित आय और अधिक पारिवारिक जिम्मेदारियों वाले लोगों का बजट ऑनलाइन शॉपिंग, बाहर खाने और अचानक आए खर्चों के कारण अक्सर बिगड़ जाता है। महीने के अंत में नकदी के संकट से बचने के लिए बिना किसी जटिल बजट प्लानिंग के सैलरी आते ही सही वित्तीय फैसले लेना आवश्यक है।
कितनी सैलरी पर कितनी बचत करें?
हर व्यक्ति की जिम्मेदारियां अलग होती हैं। इसलिए बचत की कोई एक तय रकम सभी के लिए सही नहीं हो सकती। सामान्य तौर पर टेक-होम सैलरी का 10 से 20 फीसदी बचत के लिए अलग रखने का लक्ष्य रखा जा सकता है। अगर जिम्मेदारियां कम हैं तो बचत का हिस्सा बढ़ाया जा सकता है।
| महीने की सैलरी | 10% बचत | 15% बचत | 20% बचत |
|---|---|---|---|
| ₹15,000 | ₹1,500 | ₹2,250 | ₹3,000 |
| ₹20,000 | ₹2,000 | ₹3,000 | ₹4,000 |
| ₹25,000 | ₹2,500 | ₹3,750 | ₹5,000 |
| ₹30,000 | ₹3,000 | ₹4,500 | ₹6,000 |
| ₹40,000 | ₹4,000 | ₹6,000 | ₹8,000 |
| ₹50,000 | ₹5,000 | ₹7,500 | ₹10,000 |
| ₹60,000 | ₹6,000 | ₹9,000 | ₹12,000 |
| ₹75,000 | ₹7,500 | ₹11,250 | ₹15,000 |
| ₹1,00,000 | ₹10,000 | ₹15,000 | ₹20,000 |
अगर कम सैलरी है तो क्या करें?
अगर सैलरी ₹15,000 या ₹20,000 है और घर की जिम्मेदारियां ज्यादा हैं, तो सीधे 20 फीसदी बचाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में कम से कम 5-10 फीसदी से शुरुआत की जा सकती है।
उदाहरण के लिए, ₹20,000 की सैलरी में शुरुआत में ₹1,000-₹2,000 अलग रखना भी एक अच्छी आदत बन सकती है। आमदनी बढ़ने पर बचत की रकम भी धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है।
एक आसान फॉर्मूला याद रखें
सैलरी → पहले बचत → फिर जरूरी खर्च → फिर बाकी खर्च
मसलन, अगर आपकी टेक-होम सैलरी ₹30,000 है, तो शुरुआत में ₹3,000 से ₹6,000 तक बचत के लिए अलग रखने का लक्ष्य बनाया जा सकता है। इसके बाद EMI, किराया, बिल, राशन और दूसरे जरूरी खर्चों की योजना बनाएं।
इसके लिए बहुत जटिल बजट बनाने की जरूरत नहीं है। सैलरी क्रेडिट होने के बाद बस ये 7 काम करने की आदत डाल सकते हैं।
1. सबसे पहले बचत की रकम अलग करें
सैलरी क्रेडिट होते ही सबसे पहला काम बचत के लिए तय रकम को अलग निकालना है। महीने भर के खर्चों के बाद बची हुई राशि को बचाने की कोशिश करने के बजाय, शुरुआत में ही बचत की राशि अलग करके शेष पैसों से पूरे महीने का खर्च चलाना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।
2. अगले 30 दिनों के बड़े खर्चों की सूची बनाएं
बिजली व पानी के बिल, घर या गाड़ी की ईएमआई (EMI), बच्चों की स्कूल फीस, दवाइयां और अन्य अनिवार्य भुगतानों को महीने की शुरुआत में ही नोट कर लें। इन जरूरी भुगतानों के लिए पैसा पहले ही अलग रख देने से बाद में अचानक आया कोई बड़ा खर्च महीने का बजट नहीं बिगाड़ पाता।
3. ‘खर्च वाले पैसे’ को 4 हफ्तों में बांटें
तय और आवश्यक खर्चों को अलग करने के बाद बची हुई राशि को चार बराबर हिस्सों में विभाजित कर लें। प्रत्येक हफ्ते के लिए एक निश्चित हिस्सा तय करने से महीने के शुरुआती दिनों में ही ज्यादा पैसे खर्च हो जाने की आशंका खत्म हो जाती है।
4. पिछले महीने के एक फिजूलखर्च की पहचान करें
पूरा लाइफस्टाइल एक साथ बदलने के बजाय पिछले महीने के किसी एक ऐसे गैर-जरूरी खर्च की पहचान करें जिसे आसानी से टाला जा सकता था। चालू महीने में केवल उसी एक अनावश्यक खर्च को कम करने या रोकने का लक्ष्य बनाएं।
5. ऑनलाइन शॉपिंग में 24 घंटे का नियम लागू करें
सैलरी आते ही मनपसंद चीजें खरीदने की होड़ में शामिल होने के बजाय किसी भी गैर-जरूरी खरीदारी को 24 घंटे के लिए स्थगित कर दें। एक दिन बीत जाने के बाद भी अगर उस सामान की वास्तविक जरूरत महसूस होती है, तभी उसे खरीदें।
6. छोटे डिजिटल खर्चों और सब्सक्रिप्शन की सफाई करें
अपने मोबाइल और बैंक स्टेटमेंट की जांच कर ऐसे ऐप्स या डिजिटल सेवाओं की पहचान करें जिनका उपयोग नहीं हो रहा है, लेकिन हर महीने खाते से पैसे कट रहे हैं। इन अनचाहे डिजिटल सब्सक्रिप्शन को तुरंत बंद करने से अनजाने में होने वाली फिजूलखर्ची रुक जाती है।
7. महीने के आखिरी दिनों के लिए ‘लास्ट वीक बफर’ रखें
अपनी पूरी सैलरी को 30 दिनों में पूरी तरह खर्च करने की योजना बनाने के बजाय एक छोटी रकम ‘लास्ट वीक बफर’ के रूप में बचाकर रखें। यह बफर अमाउंट महीने के अंतिम दिनों में अचानक आए किसी खर्च को संभालने में मदद करता है, जिससे आपातकालीन सेविंग्स को नहीं तोड़ना पड़ता।
5 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1: सैलरी आते ही सबसे पहला काम क्या करना चाहिए?
उत्तर: सैलरी आते ही सबसे पहले तय की गई बचत की रकम को अलग निकाल लेना चाहिए और बचे हुए पैसों से महीने का खर्च चलाना चाहिए।
Q2: ऑनलाइन शॉपिंग का 24 घंटे का नियम क्या है?
उत्तर: गैर-जरूरी खरीदारी की इच्छा होने पर सामान को तुरंत खरीदने के बजाय 24 घंटे रुकें। यदि अगले दिन भी उसकी जरूरत महसूस हो, तभी खरीदें।
Q3: ‘लास्ट वीक बफर’ रखने का क्या फायदा होता है?
उत्तर: महीने के अंतिम दिनों के लिए छोटी रकम अलग रखने से अचानक आए खर्चों के समय पुरानी बचत या इमरजेंसी फंड नहीं तोड़ना पड़ता।
Q4: महीने के खर्चों को नियंत्रित करने के लिए बजट को कैसे बांटें?
उत्तर: जरूरी खर्च निकालने के बाद बची राशि को 4 बराबर हिस्सों में बांटकर हर हफ्ते के हिसाब से खर्च करें ताकि शुरुआत में ज्यादा पैसे न खर्च हों।
Q5: अनचाहे डिजिटल खर्चों को कैसे रोकें?
उत्तर: उन ऐप्स या सेवाओं के ऑटो-डेबिट और सब्सक्रिप्शन की जांच करके उन्हें बंद कर दें जिनका नियमित इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।


