Balisto Agritech Success Story: खेती में मजदूरों की कमी और डीजल की बढ़ती लागत किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इन्हीं समस्याओं का तकनीकी समाधान तलाशने के लिए IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र ऐश्वर्या रामाकृष्णन और केदार गोखले ने अपनी कॉर्पोरेट नौकरियां छोड़कर स्टार्टअप की राह चुनी।
दोनों ने 2024 में बालिस्टो एग्रीटेक (Balisto Agritech) की शुरुआत की। कंपनी स्मार्ट इलेक्ट्रिक कृषि उपकरण बनाती है और अपने शुरुआती सवा साल में 70 लाख रुपये का रेवेन्यू दर्ज कर चुकी है।
महिंद्रा और स्विगी में काम किया, फिर चुनी खेती की राह
ऐश्वर्या रामाकृष्णन और केदार गोखले IIT बॉम्बे के 2010 बैच के पूर्व छात्र हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद ऐश्वर्या ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से MBA किया और महिंद्रा ग्रुप के फार्म इक्विपमेंट सेक्टर में काम किया। वह शिक्षा से जुड़े NGO अवंती फेलोज की सह-संस्थापक भी रहीं। दूसरी ओर, केदार गोखले ने UPSC परीक्षा दो बार पास की। मनचाहा कैडर नहीं मिलने के बाद वह कॉर्पोरेट क्षेत्र में लौट आए और स्विगी में वाइस प्रेसिडेंट (ऑपरेशंस) के पद तक पहुंचे। दोनों की रुचि सामाजिक सरोकारों, जलवायु और कृषि से जुड़े मुद्दों में थी। इसी सोच के साथ उन्होंने फरवरी 2023 में साथ काम करना शुरू किया। फरवरी 2024 में हायर ऑर्बिट एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड के तहत कंपनी रजिस्टर हुई। बाद में स्टार्टअप को एंजेल निवेशकों से प्री-सीड फंडिंग भी मिली।
किसानों की इन समस्याओं से निकला स्टार्टअप का आइडिया
स्थानीय किसानों से बातचीत के दौरान दोनों संस्थापकों ने खेती से जुड़ी समस्याओं को समझा। इनमें मजदूरों की कमी, पारंपरिक उपकरणों के इस्तेमाल से होने वाली थकान और डीजल व महंगी मशीनों के कारण बढ़ती परिचालन लागत शामिल थीं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखकर कंपनी ने 13 HP क्षमता वाला इलेक्ट्रिक मल्टीपर्पस पावर टिलर बालिस्टो 130 Pro पेश किया। इसका मकसद खेती के कई कामों को कम मेहनत और इलेक्ट्रिक तकनीक की मदद से करना है।
गन्ना, कपास और धान की खेती में काम आती है मशीन
बालिस्टो 130 Pro का इस्तेमाल गन्ना, कपास, धान, हल्दी और अदरक जैसी फसलों में जुताई, निराई-गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाने के लिए किया जा सकता है। मशीन में 2 से 5 फीट तक चौड़ाई एडजस्ट करने की सुविधा दी गई है। कंपनी इसे डीजल से चलने वाले पारंपरिक कृषि उपकरणों के विकल्प के रूप में पेश कर रही है। इलेक्ट्रिक तकनीक के इस्तेमाल से इसका उद्देश्य खेती के कामकाज में ईंधन पर निर्भरता कम करने का विकल्प उपलब्ध कराना है।
स्मार्ट बैटरी और IoT सेंसर हैं मशीन की खासियत
बालिस्टो 130 Pro में 4.6 kWh क्षमता वाली दो अलग की जा सकने वाली LFP लिथियम-आयन बैटरियां दी गई हैं। कंपनी के मुताबिक, इन बैटरियों को इस्तेमाल की अवधि से भी कम समय में चार्ज किया जा सकता है। मशीन में स्मार्ट कंट्रोल यूनिट है, जो खेत की मिट्टी के अनुसार स्पीड और टॉर्क को एडजस्ट करती है। ऑपरेटर की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसमें वाइब्रेशन कम करने की व्यवस्था और इमरजेंसी सेफ्टी लीवर भी दिया गया है। इसके अलावा, IoT सेंसर के जरिए मशीन से जुड़ा डेटा सर्वर तक पहुंचता है। इससे रिमोट मॉनिटरिंग और सर्विसिंग में मदद मिलती है।
सवा साल में 70 लाख रुपये का रेवेन्यू, ऐसे किसानों तक पहुंच रही कंपनी
बालिस्टो एग्रीटेक ने सीधे ग्राहकों को मशीन बेचने वाले मॉडल के बजाय डीलर-आधारित बिजनेस मॉडल अपनाया है। इसका उद्देश्य किसानों को अपने इलाके में ही मशीन की बिक्री के बाद जरूरी सर्विस उपलब्ध कराना है। फिलहाल महाराष्ट्र में कंपनी के 15 डीलर हैं। इनके माध्यम से मशीनों की बिक्री के साथ रेंटल एग्रीप्रेन्योर्स के जरिए भी सैकड़ों किसानों तक पहुंच बनाई गई है। कंपनी ने शुरुआती सवा साल में 70 लाख रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया है।
अब रिमोट-कंट्रोल मशीनों और नए अटैचमेंट्स पर नजर
कंपनी की आगे की योजनाओं में रिमोट-कंट्रोल आधारित कृषि मशीनें विकसित करना शामिल है। इसके साथ स्प्रेयर और ट्रॉली जैसे अटैचमेंट्स बनाने तथा बैटरी-ऐज-ए-सर्विस मॉडल की संभावनाएं तलाशने की भी योजना है। ऐश्वर्या रामाकृष्णन और केदार गोखले का सफर दिखाता है कि तकनीकी और कॉर्पोरेट अनुभव को कृषि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में लगाया जा सकता है। बालिस्टो एग्रीटेक के लिए आगे की चुनौती इस तकनीक को ज्यादा किसानों तक पहुंचाने और बिक्री के बाद की सेवाओं को मजबूत बनाने की होगी।



