Sugar price hike in India and sugar production in major countries
Sugar price hike in India and sugar production in major countries

Sugar Production in India: भारत में इन दिनों चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। अगस्त में ही चीनी की कीमतों में करीब 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, चीनी उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। ऐसे में सवाल है कि कीमतें क्यों बढ़ रही हैं, दुनिया में सबसे ज्यादा चीनी का उत्पादन कौन से देश करते हैं और भारत में कितनी चीनी मिलें हैं?

वर्ष 2024-25 में भारत में चीनी की घरेलू खपत 281 लाख मीट्रिक टन रही। इसी अवधि में चीनी का कुल उत्पादन 261 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया। यानी पहली बार इस अवधि में घरेलू खपत उत्पादन से ज्यादा रही। हालांकि, चीनी उद्योग का कहना है कि इससे देश में चीनी की किल्लत नहीं हुई है। आंकड़ों के मुताबिक 2018-19 से 2023-24 तक हर साल देश में चीनी का उत्पादन घरेलू खपत से अधिक रहा था। वर्ष 2024-25 में उत्पादन घटकर 261 लाख मीट्रिक टन रह गया, जबकि खपत बढ़कर 281 लाख मीट्रिक टन हो गई।

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अगस्त में चीनी के दाम में तेज उछाल

चीनी की कीमतों में अगस्त के दौरान तेजी देखने को मिली है। 20 अगस्त 2026 को कर्नाटक में चीनी का प्रति किलो रेट 49.96 रुपये रहा। महाराष्ट्र में यह 51.43 रुपये और उत्तर प्रदेश में 52.29 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। 13 अगस्त को कर्नाटक में चीनी का भाव 47.71 रुपये, महाराष्ट्र में 47.20 रुपये और उत्तर प्रदेश में 45.93 रुपये प्रति किलो था। यानी एक सप्ताह में तीनों प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को कर्नाटक में चीनी का भाव 43.43 रुपये, महाराष्ट्र में 43.24 रुपये और उत्तर प्रदेश में 43.22 रुपये प्रति किलो था। वहीं 20 अगस्त 2025 को इन राज्यों में कीमतें क्रमशः 40.80 रुपये, 41.59 रुपये और 41.97 रुपये प्रति किलो थीं।

दुनिया में सबसे ज्यादा चीनी कौन बनाता है?

दुनिया के चीनी उत्पादन में ब्राजील सबसे आगे है। वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 23.5 फीसदी है। भारत 16.1 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद यूरोपीय संघ 8.3 फीसदी, चीन 6.8 फीसदी और थाईलैंड 6.1 फीसदी हिस्सेदारी के साथ प्रमुख चीनी उत्पादक हैं।

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दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देश

देशवैश्विक उत्पादन में हिस्सेदारी
ब्राजील23.5%
भारत16.1%
यूरोपीय संघ8.3%
चीन6.8%
थाईलैंड6.1%
अमेरिका4.5%
पाकिस्तान3.8%
रूस3.8%
मेक्सिको3%
ऑस्ट्रेलिया2.1%

एथेनॉल उत्पादन में भी इस्तेमाल हो रही चीनी

बीते कुछ वर्षों में चीनी मिलों ने एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का इस्तेमाल बढ़ाया है। यह सरकार के निर्देश के तहत किया गया है। 2024-25 के शुगर सीजन में 35 लाख मीट्रिक टन चीनी एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल की गई। 2023-24 में यह आंकड़ा 24 लाख मीट्रिक टन था, जबकि 2022-23 में 43 लाख मीट्रिक टन चीनी एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल हुई थी।

भारत में कितनी हैं चीनी मिलें?

उपलब्ध जानकारी में भारत में चीनी मिलों की कुल संख्या का आंकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए इस आंकड़े को जोड़ना उचित नहीं होगा। हालांकि, देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक शामिल हैं, जहां चीनी के प्रति किलो भाव के आंकड़े भी दिए गए हैं।

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क्या चीनी की कमी से बढ़े हैं दाम?

चीनी उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की कोई किल्लत नहीं है। हालांकि, वर्ष 2024-25 में उत्पादन की तुलना में घरेलू खपत अधिक रही। इसी अवधि में एथेनॉल उत्पादन के लिए भी चीनी का इस्तेमाल हुआ। ऐसे में चीनी के उत्पादन, घरेलू खपत और एथेनॉल के लिए इस्तेमाल के आंकड़े इस बाजार की स्थिति को समझने में अहम हैं। फिलहाल अगस्त में चीनी के दाम में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।