नई दिल्ली। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ग्रीन इंडिया मिशन पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संसद में पेश रिपोर्ट के मुताबिक मिशन का 98% लक्ष्य पूरी तरह विफल रहा है। वर्ष 2025 तक वन क्षेत्र में 14 लाख हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इसमें से 97.57 फीसदी लक्ष्य अधूरा रह गया।
CAG ने मिशन के खराब प्रदर्शन के पीछे अपर्याप्त योजना, विभागों के बीच कमजोर समन्वय और सीमित बजट को मुख्य कारण बताया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता संदिग्ध है। कुछ आंकड़ों में बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए गए हैं और उनके समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
राज्यों ने नहीं दिखाई पारदर्शिता
GIS विश्लेषण से पता चला कि सैंपल की गई 70 फीसदी साइटों पर मिशन का कोई उल्लेखनीय असर ही नहीं दिखा। ऑडिट टीम ने 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जांच की, जिनमें से 14 राज्यों ने पारदर्शिता के लिए जरूरी पब्लिक वेब लिंक तक उपलब्ध नहीं कराए।
गलत जगह पर लगाए गए पेड़, निगरानी भी कमजोर
CAG के अनुसार मिशन के तहत पेड़ लगाने के लिए जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील इलाकों को छोड़कर कम या मध्यम प्राथमिकता वाले लैंडस्केप चुने गए। रिपोर्ट में वित्तीय कुप्रबंधन, अनुचित योजना और निगरानी में कमी का भी जिक्र है।
ऑडिट में ऐसे मामले भी मिले जहां करोड़ों रुपये की लागत से बनी बुनियादी सुविधाओं का इस्तेमाल ही नहीं हुआ। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं।
2010 में हुई थी मिशन की शुरुआत
ग्रीन इंडिया मिशन की शुरुआत 2010 में NAPCC के तहत मनमोहन सिंह सरकार में हुई थी। इसका मकसद वन क्षेत्र बढ़ाना, पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, जलवायु परिवर्तन से निपटना और वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आजीविका बढ़ाना था।
कांग्रेस पार्टी ने लगाया ये आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि 2014-15 के बाद नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में मिशन का क्रियान्वयन अपेक्षित गति से नहीं हो सका। पार्टी के मुताबिक, CAG रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है कि कई स्थानों पर सही तरीके से लैंडस्केप का चयन नहीं किया गया, निगरानी व्यवस्था कमजोर रही और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई।
कांग्रेस ने कहा कि एक दशक किसी भी सरकारी योजना के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए पर्याप्त समय होता है। पार्टी ने CAG रिपोर्ट के आधार पर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ग्रीन इंडिया मिशन का प्रदर्शन उसके बड़े-बड़े दावों के अनुरूप नहीं रहा।
हरित भारत मिशन क्या है?
यह जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के 8 मिशनों में से एक है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के घटते वन आवरण की रक्षा और वृद्धि करना है। मिशन वन और गैर-वन भूमि की गुणवत्ता सुधारने, जैव विविधता बचाने, जल विज्ञान सेवाएं बेहतर करने और कार्बन पृथक्करण बढ़ाने पर काम करता है। इसे वन विभाग, राज्य सरकारों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर चलाया जाता है।
FAQ: ग्रीन इंडिया मिशन फेल
सवाल: CAG रिपोर्ट में ग्रीन इंडिया मिशन को लेकर क्या कहा गया?
CAG ने कहा कि मिशन का 97.57% लक्ष्य अधूरा है। 14 लाख हेक्टेयर वन बढ़ाने का लक्ष्य था लेकिन बहुत कम हासिल हुआ।
सवाल: लक्ष्य पूरा न होने की मुख्य वजह क्या बताई गई?
अपर्याप्त योजना, विभागों में समन्वय की कमी, सीमित बजट, गलत लैंडस्केप का चयन और कमजोर निगरानी।
सवाल: ग्रीन इंडिया मिशन कब शुरू हुआ था?
इसकी शुरुआत 2010 में NAPCC के तहत मनमोहन सिंह सरकार के समय हुई थी।
सवाल: CAG ने आंकड़ों पर क्या सवाल उठाए?
CAG ने कहा कि कुछ आंकड़ों में बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए गए हैं और 70% साइटों पर मिशन का असर नहीं दिखा।
सवाल: इस मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
वन क्षेत्र बढ़ाना, जैव विविधता बचाना, जलवायु परिवर्तन से निपटना और वन क्षेत्र के लोगों की आजीविका सुधारना।


