छत्तीसगढ़ में साड़ी घोटाला कांड के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का बड़ा फैसला

टीआरपी। छत्तीसगढ़ में कुछ महीने पहले सामने आए साड़ी घोटाला कांड के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा फेरबदल किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए साड़ी की सेंट्रलाइज्ड खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर राशि सीधे उनके खातों में भेजने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

यह फैसला छत्तीसगढ़ की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सीधे तौर पर सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएगा। साड़ी खरीदी प्रक्रिया में होने वाले पूर्व के घोटालों, भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका को जड़ से खत्म कर शासन की राशि सीधे हकदारों तक पहुंचेगी, जिससे विभाग की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बहाल होगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि पूर्व में संचालनालय स्तर पर होने वाली साड़ी की केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था को अब बंद कर दिया गया है। साड़ी खरीदी के लिए निर्धारित राशि अब सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाएगी। हाल ही में साड़ी खरीदी को लेकर सामने आए विभिन्न विवादों और प्राप्त सुझावों का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। इससे आंगनबाड़ी बहनों को अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुरूप साड़ी का कपड़ा (जैसे कॉटन, सिंथेटिक आदि) चुनने की पूरी आजादी होगी।

See also  इंटरनेशनल मार्केट में मची उथल-पुथल: 1600 रुपये से ऊपर पहुंची एक एलपीजी सिलिंडर की असली लागत, जानें क्यों घाटा सहकर भी भारत में मिल रही सबसे सस्ती गैस

विभागीय निर्देशों के अनुसार, पूरे प्रदेश में एकरूपता बनाए रखने के लिए साड़ी का रंग एवं डिज़ाइन विभागीय स्तर पर तय कर उसकी जानकारी विभाग की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। साड़ी का अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से परामर्श के बाद ही निर्धारित किया जाएगा। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डीबीटी सोच और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

वार्षिक प्रावधान: भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म देने का प्रावधान है।

निर्धारित राशि: प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित की गई है, जो अब सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर होगी।

पारदर्शी मॉडल: साड़ी की सेंट्रलाइज्ड खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर 100% डीबीटी मॉडल लागू किया गया है।

इस ऐतिहासिक फैसले के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग जल्द ही साड़ी के स्वीकृत रंग और डिज़ाइन को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी करेगा। इसके तुरंत बाद निर्धारित राशि सीधे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के खातों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिससे वे स्थानीय स्तर पर स्वयं साड़ी खरीद सकेंगी।

See also  बजट के बाद महंगे हो सकते हैं ये डिवाइसेस, 50 आइटम्स पर बढ़ सकती है इंपोर्ट ड्यूटी