Chhattisgarh Congress Chief Spokesperson Surendra Verma
मिनरल संशोधन अध्यादेश 2026 के खिलाफ छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने हमला बोला है

Mineral Amendment Ordinance 2026: संसद के दोनों सदनों से पारित ‘मिनरल संशोधन अध्यादेश 2026’ (खान और खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक) को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने इसे अधिनायकवादी फैसला करार देते हुए कहा कि यह कानून छत्तीसगढ़ जैसे खनिज समृद्ध राज्य के आर्थिक हितों पर सीधा हमला है और इससे राज्य को भारी राजस्व क्षति होगी।

राज्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण का आरोप

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि संसद में बिना किसी सार्थक चर्चा के इस विधेयक को जल्दबाजी और हंगामे के बीच पारित कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अपने पूंजीपति मित्रों के मुनाफे के लिए यह कानून थोपा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक लागू MMDR Act 1957 मुख्य और गौण खनिजों के बीच स्पष्ट अंतर करता था, लेकिन नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज वाली भूमि पर अतिरिक्त कर (Tax) या उपकर (Cess) लगाने के अधिकार को छीनना है। इससे राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को निष्प्रभावी करने का प्रयास

सुरेंद्र वर्मा ने संवैधानिक पहलुओं का हवाला देते हुए कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘भूमि’ राज्य सूची का विषय है। वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की संवैधानिक अनुमति दी थी।

उन्होंने कहा कि यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के उसी ऐतिहासिक फैसले को निष्प्रभावी (Abolish) करने के लिए लाया गया है। इसके जरिए केंद्र सरकार ने खनिज-युक्त भूमि पर सेस और टैक्स तय करने की असीमित शक्तियां अपने पास रख ली हैं और राज्यों द्वारा पहले से निर्धारित लेकिन अप्राप्त करों को अवैध घोषित कर दिया है। यह सीधे तौर पर संघीय ढांचे (Federalism) पर कुठाराघात है।

पर्यावरण क्षति की भरपाई पर रोक और JPC की मांग को खारिज करने का विरोध

कांग्रेस प्रवक्ता ने चिंता जताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल जैसे खनिज उत्पादक राज्यों में खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरण और स्थानीय बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को भारी नुकसान पहुंचता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकारें अतिरिक्त लेवी या टैक्स लगाती थीं, जिस पर अब केंद्र ने पूरी तरह रोक लगा दी है।

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उन्होंने याद दिलाया कि पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों (पेसा कानून) के अधिकारों और ग्रामसभाओं की आपत्तियों को दरकिनार कर पहले भी निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया है। कांग्रेस ने इस संवेदनशील बिल को समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की मांग की थी, जिसे मोदी सरकार ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

(FAQs)

प्रश्न 1: कांग्रेस के अनुसार ‘मिनरल संशोधन अध्यादेश 2026’ का राज्यों पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर: कांग्रेस के अनुसार यह संशोधन राज्यों के कर (Tax) और उपकर (Cess) लगाने के संवैधानिक अधिकार को छीनता है, जिससे छत्तीसगढ़ जैसे खनिज उत्पादक राज्यों के राजस्व में भारी कमी आएगी।

प्रश्न 2: MMDR Act 1957 में इस संशोधन के बाद मुख्य बदलाव क्या आया है?

उत्तर: नए संशोधन के तहत खनिज-युक्त भूमि और खनिज अधिकारों पर कर या लेवी तय करने की शक्ति केंद्र के पास चली गई है और राज्य सरकारों द्वारा अतिरिक्त टैक्स लगाने पर रोक लगा दी गई है।

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प्रश्न 3: सुप्रीम कोर्ट के किस फैसले का जिक्र कांग्रेस प्रवक्ता ने इस मामले में किया?

उत्तर: उन्होंने वर्ष 2024 के सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच के उस ऐतिहासिक फैसले का जिक्र किया, जिसमें राज्यों को खनिजों पर कर लगाने का अधिकार दिया गया था। आरोप है कि नए संशोधन से इस फैसले को निष्प्रभावी किया जा रहा है।

प्रश्न 4: कांग्रेस ने इस विधेयक के संसद में पारित होने की प्रक्रिया पर क्या आपत्ति जताई?

उत्तर: कांग्रेस ने आपत्ति जताई कि विधेयक को संसद में बिना किसी विस्तृत चर्चा या बहस के जल्दबाजी में पारित कराया गया और इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने की मांग को भी खारिज कर दिया गया।

प्रश्न 5: खनन से होने वाले स्थानीय नुकसान को लेकर क्या चिंता व्यक्त की गई है?

उत्तर: कांग्रेस ने कहा कि राज्य सरकारें खनन से होने वाले पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के नुकसान की भरपाई के लिए स्थानीय टैक्स लगाती थीं, जिस पर रोक लगने से पर्यावरण और प्रभावित क्षेत्रों का विकास बाधित होगा।