रायपुर। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम (पापुनि) में कागज की मोटाई बढ़ाकर करोड़ों के घोटाले की कोशिश का एक और मामला सामने आया है। शासन स्तर पर समय रहते हस्तक्षेप न होता, तो स्कूल किताबों की छपाई के नाम पर करीब 14 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ सरकारी खजाने पर डाल दिया जाता। समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर पापुनि द्वारा जारी पुराना टेंडर रद्द कर दिया गया है और नए टेंडर में कागज की मोटाई पूर्ववत रखने का फैसला लिया गया है।

यह पहला मौका नहीं है जब पाठ्यपुस्तक निगम में कागज की गुणवत्ता और मोटाई के नाम पर इस तरह के फैसले लिए गए हों। इससे पहले भी टीआरपी पाठ्यपुस्तक निगम से जुड़े कई घोटालों का खुलासा कर चुका है। इतना ही नहीं टीआरपी ने पहले ही पेपर जीएसएम बढ़ाने की आड़ में भ्रष्टाचार का अंदेशा जताया था। आपको बता दें कि पापुनि में कागज की खरीद और छपाई प्रक्रिया की आड़ में वर्षों से बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का खेल खेला जाता रहा है।

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इस बार शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा पहली से आठवीं तक की मुफ्त पाठ्यपुस्तकों की छपाई में आंतरिक पृष्ठों के लिए 70 जीएसएम की जगह 80 जीएसएम कागज इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत करीब 11 हजार मीट्रिक टन कागज खरीदे जाने का प्रस्ताव था। विशेषज्ञों के मुताबिक 70 जीएसएम कागज में भी किताबों की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर्याप्त रहता है, ऐसे में मोटाई बढ़ाने का फैसला न तो शैक्षणिक दृष्टि से जरूरी था और न ही व्यावहारिक।

कागज की मोटाई बढ़ाने से जहां एक ओर बच्चों के बस्तों का वजन बढ़ता, वहीं दूसरी ओर छपाई लागत में करीब 14 करोड़ रुपये की सीधी बढ़ोतरी होती। इसी वजह से इस फैसले को शुरू से ही संदेह की नजर से देखा जा रहा था और बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही थी।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में पूरे मामले की पड़ताल के बाद स्पष्ट निर्देश दिए गए कि पुस्तकों की छपाई 70 जीएसएम कागज (अंदर के कागज) में ही की जाए। इसके बाद पुराने टेंडर को रद्द कर नई प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया। नए टेंडर में 2024-25 सत्र की शर्तें ही लागू रहेंगी। कवर पेज के लिए 220 जीएसएम कागज और कक्षा 9वीं-10वीं के लिए 70 जीएसएम कागज उपयोग करने का निर्णय बरकरार रखा गया है।

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इस बारे में पापुनि के जीएम डिगेश पटेल का कहना है कि कागज की मोटाई पूर्ववत रखने से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा और छात्रों को भी राहत मिलेगी। हालांकि सवाल अब भी बना हुआ है कि जब 70 जीएसएम कागज में गुणवत्ता पर्याप्त है, तो फिर मोटाई बढ़ाने का प्रस्ताव आखिर किसके फायदे के लिए लाया गया था।

फिलहाल शासन की सख्ती से एक बड़ा संभावित घोटाला टल गया है, लेकिन पाठ्यपुस्तक निगम में बार-बार उठते ऐसे मामलों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।